
Nashik Education Department (सोर्सः सोशल मीडिया)
Teachers Protest Nashik: नासिक विभागीय शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय का कामकाज एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। शिक्षकों और प्राध्यापकों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित जनता दरबार में शिक्षकों ने तीखी नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। शिक्षकों का आरोप है कि बिना पैसे दिए यहां कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती। आक्रोशित शिक्षकों ने कार्यालय परिसर में जोरदार नारेबाजी की।
नासिक विभाग के चारों जिलोंनासिक, अहमदनगर, जलगांव और धुले से सैकड़ों शिक्षक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नासिक रोड स्थित शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय में एकत्र हुए थे। इस जनता दरबार का आयोजन शिक्षक विधायक किशोर दराडे की उपस्थिति में किया गया था। हालांकि, दो घंटे बीत जाने के बावजूद विभागीय शिक्षा उपनिदेशक संजय कुमार राठौड़ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के न पहुंचने पर शिक्षकों का धैर्य टूट गया।
आक्रोशित शिक्षकों ने कार्यालय में प्रवेश करने का प्रयास किया, जिससे कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद अधिकारी बाहर आए। इस दौरान शिक्षकों ने खुले तौर पर आरोप लगाया कि कार्यालय के कर्मचारी हर कार्य के लिए पैसों की मांग करते हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे जून माह से कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद उनकी फाइलों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
बढ़ते विवाद को देखते हुए शिक्षा उपनिदेशक संजय कुमार राठौड़ ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि विभाग इस समय अत्यधिक कार्यभार के दबाव में है। जीपीएफ, पेंशन और मेडिकल बिल जैसे मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन तकनीकी खामियों और अदालती प्रक्रियाओं के कारण कुछ प्रकरणों में देरी हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य किसी भी शिक्षक को परेशान करना नहीं है।
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उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व इसी कार्यालय के कुछ अधिकारी भ्रष्टाचार के मामलों में जेल जा चुके हैं। ऐसी पृष्ठभूमि में शिक्षकों द्वारा लगाए जा रहे नए रिश्वत के आरोप विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करते हैं। शिक्षक विधायक किशोर दराडे की मध्यस्थता और फरवरी तक लंबित मामलों के निपटारे के आश्वासन के बाद आंदोलन शांत हुआ, लेकिन समाज का निर्माण करने वाले शिक्षकों का न्याय के लिए सड़कों पर उतरना शिक्षा विभाग की गिरती साख को उजागर करता है।






