
Archaeological Survey of India (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bombay High Court: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने मुंबई उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के निवास ‘सावरकर सदन’ को केंद्र संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह 100 वर्ष पुराना होने की अनिवार्य शर्त को पूरा नहीं करता।
हालांकि, एएसआई ने सुझाव दिया है कि मध्य मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क क्षेत्र में मौजूद इस भवन को संरक्षित किया जा सकता है, यदि इसे बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की विरासत सूची या राज्य-संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल किया जाए।
एएसआई ने पिछले सप्ताह दायर अपने हलफनामे में कहा कि ऐसा कदम भवन को ध्वस्त होने से बचा सकता है और भविष्य में इसके संरक्षण को सुनिश्चित करेगा। यह हलफनामा ‘अभिनव भारत कांग्रेस’ नामक एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा दायर जनहित याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है। शिवाजी पार्क क्षेत्र में स्थित सावरकर सदन का निर्माण वर्ष 1938 में हुआ था। हिंदुत्व विचारक और स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर यहां 1966 तक रहे, उसी वर्ष उनका निधन हुआ था।
ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, इस परिसर में कई महत्वपूर्ण बैठकें हुई थीं, जिनमें वर्ष 1940 में सुभाष चंद्र बोस के साथ तथा 1948 में नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे के साथ हुई बैठकें भी शामिल हैं।
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जनहित याचिका में भवन को ‘राष्ट्रीय महत्व का स्मारक’ घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। एएसआई ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि वह केवल उन्हीं स्मारकों या स्थलों का संरक्षण करता है, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया गया हो।
एएसआई ने यह भी कहा कि किसी ढांचे को केंद्र संरक्षित स्मारक घोषित करने के लिए उसका कम से कम 100 वर्ष पुराना होना आवश्यक है। मामले की सुनवाई अगले सप्ताह मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा किए जाने की संभावना है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)






