सरकारी अस्पताल चौकी में बवाल, बार एसोसिएशन का प्रदर्शन; नासिक में वकील से मारपीट, आरोपी निलंबित

Lawyer Assault: नासिक जिला सरकारी अस्पताल चौकी में एक वकील से मारपीट के बाद हंगामा मच गया। विरोध में बार एसोसिएशन ने प्रदर्शन किया, वहीं आरोपी थाना प्रभारी को निलंबित किया गया।
Chaos at government hospital police outpost, Bar Association stages protest; lawyer assaulted in Nashik, accused suspended
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
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Bar Association Protest: नासिक जिला सरकारी अस्पताल की पुलिस चौकी में तैनात एक थाना प्रभारी द्वारा कानूनी जानकारी लेने गए एक वकील के साथ बेरहमी से मारपीट करने की चौंकाने वाली घटना सामने आई है।

इस घटना के विरोध में नासिक बार एसोसिएशन के सदस्यों ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने आरोपी पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

विवाद की वजह और मारपीट का घटनाक्रम

जिला न्यायालय के वकील एड। तुषार दोंदे अपने सहयोगी कर्मचारी श्रीकांत नावंदर की आत्महत्या के मामले में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने जिला अस्पताल गए थे। वहां तैनात थाना प्रभारी विश्वजीत राणे से जब एड। दोंदे ने घटना से संबंधित दस्तावेजों की मांग की, तो राणे ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। विवाद इतना बढ़ा कि राणे ने वकील की बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे एड. दोंद के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं। मारपीट की खबर मिलते ही बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में वकील जिला न्यायालय के बाहर एकत्र हुए और प्रदर्शन किया।

पुलिस आयुक्त का सख्त फैसला

वकीलों के भारी दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने विश्वजीत राणे को तुरंत निलंबित करने का आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, जांच पूरी होने तक राणे निलंबित रहेंगे और बिना लिखित अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ पाएंगे। निलंबन अवधि के दौरान वे किसी भी निजी नौकरी या व्यवसाय में शामिल नहीं हो सकेंगे।

केवल निलंबन काफी नहींः बार एसोसिएशन

बार एसोसिएशन ने अब आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। नासिक बार एसोसिएशन के सचिव एड. हेमंत शंकर गायकवाड ने कहा कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है, आरोपी हवलदार के खिलाफ सख्त धाराओं में केस दर्ज होना चाहिए।

इस मामले की प्रतिलिपि न्यायमूर्ति एस. डी. जगमलानी को भी भेजी गई है ताकि न्यायिक हस्तक्षेप सुनिश्वित हो सके वकीलों ने मांग की है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों का व्यवहार कानून के रक्षकों (वकीलों) के प्रति सम्मानजनक होना चाहिए।

इस घटना के बाद नासिक के वकीलों ने एकजुटता दिखाते हुए काम बंद आंदोलन की भी चेतावनी दी है। एड. दोंदे के साथ हुई इस घटना को वकीलों ने पूरे कानूनी पेशे का अपमान बताया है।

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