
एनसीपी विधायक सरोज अहिरे व अजित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Saroj Ahire Emotional Speech Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र की राजनीति के एक प्रमुख स्तंभ और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी को एक दुखद विमान दुर्घटना में निधन हो गया है। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे महाराष्ट्र राज्य को शोक और दुख की गहरी छाया में डुबो दिया है। अजित दादा के आकस्मिक निधन की खबर मिलते ही उनके समर्थकों और राजनीतिक हलकों में सन्नाटा पसर गया है।
अजित पवार के निधन के बाद नासिक जिले की देवलाली विधानसभा क्षेत्र में एक शोक सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा के दौरान विधायक सरोज अहिरे अपने आंसू नहीं रोक सकीं और अत्यंत भावुक नजर आईं। उन्होंने दादा के साथ अपनी आखिरी मुलाकातों को याद करते हुए एक ऐसी कहानी सुनाई, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों को नम कर दिया। सरोज अहिरे ने बताया कि अजित दादा ने जाने से पहले जो आखिरी फाइल साइन की थी, वह भी जनकल्याण से जुड़ी थी।
विधायक सरोज अहिरे ने रुंधे गले से बताया कि अजित दादा ने उनके निर्वाचन क्षेत्र के सैयद पिंपरी में श्मशान घाट के निर्माण कार्य के लिए 1 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की थी। उन्होंने उस फाइल पर अपने जीवन का अंतिम हस्ताक्षर किया और इसके कुछ समय बाद ही दादा हमसे दूर चले गए। सरोज अहिरे ने कहा, “मैं इस बात को कैसे भूल सकती हूं? मैं अपने आंसू कैसे रोकूं? उनका आखिरी काम भी समाज के अंतिम संस्कार से जुड़े स्थल के लिए था।
अहिरे ने अपने संबोधन में कहा कि उनका मन यह स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि दादा अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत क्षति को साझा करते हुए कहा कि जब उनके पिता का निधन हुआ था, तब वह बहुत छोटी थीं और मौत का अर्थ भी नहीं समझती थीं, लेकिन आज दादा के जाने से उन्हें पिता जैसा सहारा खोने का एहसास हो रहा है। उन्होंने कहा कि दादा ने उनके जैसी एक साधारण लड़की को विधायक बनाया और हमेशा एक पिता की तरह प्यार दिया।
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सरोज अहिरे के अनुसार, अजित पवार केवल एक नेता नहीं बल्कि किसानों के मसीहा थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि दादा ने कभी भी “गंदी राजनीति” नहीं की और हमेशा काम को प्राथमिकता दी। विधायक ने संकल्प लिया कि वह अपने जीवनकाल में कभी भी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नहीं छोड़ेंगी और पार्टी के आदेशानुसार पूरी मजबूती के साथ पवार परिवार के पीछे खड़ी रहेंगी। उन्होंने कहा कि दादा की सीख के अनुसार काम जारी रखना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।






