

Aaditya Thackeray reaction Union Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है। शिवसेना (UBT) के नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने बजट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के खजाने में सबसे अधिक जीएसटी, आयकर और जीडीपी का योगदान देने के बावजूद महाराष्ट्र को वह हक नहीं मिला जिसका वह हकदार था।
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पोस्ट साझा करते हुए भाजपा सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार केवल चुनावों के चश्मे से बजट देखती है। आदित्य ने लिखा, "महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा करदाता राज्य है। चाहे वह जीडीपी हो, जीएसटी हो या आयकर, हम सबसे आगे हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि बजट आवंटन में महाराष्ट्र को आनुपातिक रूप से सबसे अधिक उपेक्षित रखा गया है।"
बजट में मुंबई-पुणे और सात अन्य शहरों के बीच हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर की घोषणा पर आदित्य ठाकरे ने स्पष्टता की मांग की। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि इन बड़ी परियोजनाओं के लिए पैसा कहाँ से आएगा? क्या इसका पूरा भार राज्य सरकार पर डाला जाएगा या केंद्र इसे वित्त पोषित करेगा? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिना वित्तीय स्पष्टता के ऐसी घोषणाएं केवल कागजी लगती हैं और जनता को गुमराह करने का प्रयास हैं।
आदित्य ठाकरे ने आर्थिक नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि वित्त मंत्री ने जानबूझकर देश की "आर्थिक अस्थिरता" और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये जैसे गंभीर मुद्दों पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय था जब रुपये की गिरावट पर भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर जमकर विरोध किया था, लेकिन आज जब रुपया अपने निचले स्तर पर है, तो बजट में इस पर कोई ठोस भरोसा नहीं दिलाया गया।
आदित्य ठाकरे के अनुसार, यह बजट नागरिकों के मन में आर्थिक सुरक्षा का भाव जगाने में विफल रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू महंगाई के बीच आम आदमी को जिस राहत की उम्मीद थी, वह गायब है। आदित्य ने केंद्र को सलाह दी कि अगर सरकार "चुनावों से परे" राष्ट्रहित के मुद्दों पर सोचना शुरू करे, तो यह वास्तव में भारत के लिए एक "उपहार" होगा।
ठाकरे का यह बयान महाराष्ट्र में आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर 'महाराष्ट्र के स्वाभिमान' और 'आर्थिक अन्याय' के मुद्दे को केंद्र में रखा है।