
सुप्रिया सुले व सुनेत्रा पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sharad Pawar vs Ajit Pawar Faction: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म था, लेकिन अब इस पर आंतरिक खींचतान खुलकर सामने आ गई है। जहां शरद पवार गुट के नेता दोनों गुटों के विलय के पक्ष में हैं। वहीं अजित पवार गुट के नेता विलय से किनारा करते दिख रहे हैं।
कहा जा रहा है कि अजित पवार गुट के कई दिग्गज विधायक और मंत्री, शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ विलय (Merger) के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ में सुप्रिया सुले का नाम सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि अजित गुट के नेताओं के भीतर सुप्रिया सुले की कार्यशैली और भविष्य के नेतृत्व को लेकर गहरी नाराजगी है। इन नेताओं का मानना है कि यदि आज विलय होता है, तो पार्टी में उनकी अहमियत कम हो जाएगी और कमान पूरी तरह से सुले के हाथों में चली जाएगी। इसी असहमति ने विलय की चर्चाओं पर ब्रेक लगा दिया है।
अजित पवार के करीबी माने जाने वाले मंत्रियों का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि अब विलय की तमाम अटकलों पर पूर्णविराम लगा दिया जाए। उनका तर्क है कि वे अपनी अलग पहचान के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। पार्टी के भीतर एक गुप्त बैठक की भी खबरें हैं, जिसमें अधिकांश विधायकों ने शरद पवार खेमे में वापस जाने की बजाय भाजपा-महायुति के साथ अपने गठबंधन को मजबूत करने की वकालत की है।
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दूसरी ओर, शरद पवार गुट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन बातचीत के दरवाजे खुले होने की चर्चाएं गलियारों में आम हैं। हालांकि, अजित गुट के इस कड़े रुख ने एकता की उम्मीदों को करारा झटका दिया है। अब देखना यह होगा कि महाराष्ट्र का यह ‘पावर गेम’ ऊंट किस करवट बैठता है। क्या भावनात्मक अपील काम आएगी या राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं एक नए रास्ते का निर्माण करेंगी?






