नासिक जिला परिषद में गड़बड़ी उजागर, CEO का बड़ा फैसला, जल संरक्षण के 58 प्रोजेक्ट कैंसिल

Nashik Zilla Parishad: नासिक में जलयुक्त शिवार योजना के तहत मंजूर ₹15.95 करोड़ के 58 कार्य अनियमितताओं के चलते रद्द किए गए हैं। CEO ओमकार पवार ने निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी उजागर होने पर फैसला लिया।
Irregularities exposed in Nashik Zilla Parishad, CEO takes major decision, cancels 58 water conservation projects.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Jalyukt Shivar Yojana: नासिक राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'जलयुक्त शिवार योजना' नासिक जिला परिषद के भीतर चल रही प्रशासनिक उठापटक के कारण चर्चा में है। जिला परिषद के जल संरक्षण विभाग द्वारा मंजूर किए गए 15 करोड़ 95 लाख रुपये के 58 कार्यों को एक झटके में रद्द कर दिया गया है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमकार पवार ने निविदा प्रक्रिया में मची लूट और अनियमितताओं को भांपते हुए यह साहसिक फैसला सुनाया है।

दस्तावेजों से लेकर वर्क ऑर्डर तक धांधली

ग्रामीण इलाकों की प्यास बुझाने के लिए आए फंड पर विभागीय साठगांठ की छाया पड़ गई थी। जांच में ई-निविदा प्रक्रिया के दौरान कई चौंकाने वाली खामियां मिलीं। निविदा भरने वाले ठेकेदारों के कागजातों में भारी हेरफेर पाया गया। आरोप है कि कुछ चहेते ठेकेदारों की झोली भरने के लिए नियमों को मरोड़ा गया और जो वास्तव में पात्र थे, उन्हें तकनीकी बाहाने बनाकर रेस से बाहर कर दिया गया। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद जानबूझकर 'कार्यारंभ आदेश' दबाकर रखे गए,

रात के अंधेरे में अपात्र हुए पात्र

प्रशासनिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उस 'चमत्कार' की है, जिसमें जिन ठेकेदारों को शुरुआत में दस्तावेजों की कमी के कारण 'अपात्र' घोषित किया गया था, वे कुछ समय बाद उन्हीं कागजों के साथ अचानक 'पात्र' हो गए, हमने जलयुक्त शिवार योजना के अंतर्गत होने वाले कार्यों की विस्तृत समीक्षा की है।

इस पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर गंभीर अनियमितताएं और खामियां पाई गई हैं। घारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि वर्तमान में स्वीकृत सभी कार्यों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए, अब इन कार्यों के लिए नए सिरे से पारदर्शी तरीके से फेर-निविदा प्रक्रिया लागू की जाएगी।

- ओमकार पवार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद

रिटायरमेंट से पहले बढ़ा तनाव, अधिकारी रडार पर

लेकिन खेल तब चिगड़ गया जब यह फाइल वित विभाग के पास पहुंची, वित्त विभाग ने इस अनियमितता पर सख्त 'नेगेटिव रिमार्क' लगा दिया, जिससे घोटाले की पूरी पोल खुल गई।

अतिरिक्त सीईओ अर्जुन गुंडे 28 फरवरी को सेवानिवृत होने वाले हैं, ऐसे में अब पूरा दारोमदार ओमकार पंवार के कंचों पर है। सूत्रों का कहना है कि सिर्फ टेंडर रद्द करना ही काफी नहीं है।

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