पीपीपी मॉडल से चमकेगा ITI का भविष्य; नागपुर विभाग की 78 संस्थाओं में 47 बड़ी कंपनियां करेंगी निवेश

Maharashtra ITI PPP Model: महाराष्ट्र में आईटीआई का कायाकल्प। पीपीपी मॉडल से बदलेंगे पाठ्यक्रम। नागपुर विभाग की 78 संस्थाओं में उद्योगों की सीधी भागीदारी, छात्रों को मिलेगा सीधा रोजगार।
Maharashtra govt to transform ITIs through PPP model.
पीपीपी मॉडल (AI Generated Image)
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Industrial Training Institute Reforms: राज्य की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाएं (आईटीआई) अब बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी हैं। उद्योग जगत की बदलती आवश्यकताओं और कुशल मानव संसाधन की कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने आईटीआई को अधिक सक्षम और उद्योगोन्मुख बनाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) नीति अपनाने का फैसला किया है।

इस नई नीति के तहत आईटीआई के पाठ्यक्रम तय करने में उद्योगों की सीधी भागीदारी होगी। वर्तमान में कई आईटीआई में चल रहे पाठ्यक्रम समय के अनुरूप नहीं हैं। आधुनिक उद्योगों की जरूरतों से मेल नहीं खाते। इस अंतर को पाटने के लिए उद्योग विशेषज्ञों और कौशल विकास संस्थानों को पाठ्यक्रम निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा।

इससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक मशीनरी और व्यावहारिक प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा। इस परियोजना की शुरुआत नागपुर विभाग से की गई है। विदर्भ क्षेत्र की वार्षिक 100 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाली 47 प्रमुख कंपनियों से इस संबंध में चर्चा की जा चुकी है। विभाग की 78 शासकीय आईटीआई में यह नीति लागू की जाएगी, जिनमें से 17 संस्थाएं अकेले नागपुर जिले में स्थित हैं।

  • 17 आईटीआई नागपुर जिले में
  • 47 कंपनियों से हुई चर्चा
  • 78 आईटीआई विभाग में

उद्योगों को मिलेगा प्रशिक्षित मैनपॉवर

प्रादेशिक व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यालय के उपनिदेशक पी.टी. देवतले ने बताया कि उद्योगों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और पीपीपी नीति को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। इस परियोजना में ‘मित्रा’ (महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन) रणनीतिक भागीदार की भूमिका निभाएगी।

पीपीपी मॉडल के तहत भाग लेने वाली कंपनियों को 10 वर्षों के लिए न्यूनतम 10 करोड़ रुपये या 20 वर्षों के लिए 20 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। हालांकि निवेश निजी होगा, लेकिन आईटीआई की जमीन और इमारतों का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा।

प्रत्येक आईटीआई में एक संस्थान प्रबंधन समिति (आईएमसी ) गठित की जाएगी, जिसमें निजी भागीदार अध्यक्ष होंगे, जबकि प्राचार्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। इन बदलावों से विद्यार्थियों को उद्योगों में अप्रेंटिसशिप और इसके बाद सीधे रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है। वहीं उद्योगों को अपनी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होने से रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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