पुणे में 10% प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ोतरी पर मनपा का यू-टर्न, प्रस्ताव अगली बैठक तक टला

Pune Municipal Corporation ने प्रस्तावित 10% प्रॉपर्टी टैक्स वृद्धि को फिलहाल टाल दिया है। आयुक्त द्वारा फैसला अगली बैठक तक स्थगित किए जाने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
Pune Local Body Election Candidates Disqualified
पुणे महानगरपालिका (सौ. सोशल मीडिया )
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PMC Property Tax Hike: पुणे महानगर पालिका में प्रस्तावित 10 प्रतिशत प्रॉपर्टी टैक्स वृद्धि को लेकर प्रशासन ने यू-टर्न ले लिया है। मनपा की आय बढ़ाने और विकास कार्यों पर बढ़ते खर्च के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से लाया गया यह प्रस्ताव फिलहाल टाल दिया गया है।

शुक्रवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में इस पर निर्णय अपेक्षित था, लेकिन मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने इसे अगली बैठक के लिए स्थगित कर दिया, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

टैक्स में दस साल से कोई बढ़ोतरी नहीं

मनपा प्रशासन का कहना है कि पिछले करीब दस वर्षों से प्रॉपर्टी टैक्स में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस दौरान कर्मचारियों के वेतन, बुनियादी सुविधाओं, सड़क, पानी, सीवरेज और अन्य विकास कार्यों पर खर्च लगातार बढ़ता गया है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट संतुलित रखने के लिए 10 प्रतिशत टैक्स वृद्धि जरूरी बताई गई थी। इसी आधार पर यह प्रस्ताव स्थायी समिति के समक्ष रखा गया था।

प्रशासन के निर्णय पर उठाए जा रहे सवाल

हालांकि, इस फैसले को टालने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में पुणे मनपा में पिछले चार वर्षों से निर्वाचित जनरल बॉडी नहीं थी और पूरा प्रशासन प्रशासक के माध्यम से संचालित हो रहा था। आयुक्त स्वयं प्रशासक और स्थायी समिति के अध्यक्ष होने के कारण यह माना जा रहा था कि प्रस्ताव को आसानी से मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन ऐन वक्त पर इसे टालना चौंकाने वाला कदम माना जा रहा है।

हाल ही में सपन्न मनपा चुनावों में भाजपा ने बहुमत हासिल कर सत्ता बरकरार रखी है। हालांकि नई जनरल बॉडी की पहली बैठक और नए महापौर व स्थायी समिति के गठन में अभी समय है।

माना जा रहा है कि प्रशासक अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में कोई अलोकप्रिय फैसला लेकर नई निर्वाचित सत्ता पर दबाव नहीं डालना चाहते। अब यह प्रस्ताव नए सदन के पाले में चला गया है। ऐसे में देखना होगा कि नई स्थायी समिति और जनरल बॉडी जनता की नाराजगी के डर से टैक्स वृद्धि को खारिज करती है या वित्तीय जरूरतों को प्राथमिकता देती है।

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