

Nagpur High Court Property Dispute: नागपुर सम्पत्ति पर कब्जा लेने की बैंक द्वारा की जा रही कार्रवाई को चुनौती देते हुए सेवल हार्स सेल्स कॉर्पोरेशन की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने अंतरिम राहत प्रदान कर बैंक द्वारा की जा रही कार्रवाई पर रोक लगा दी।
सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माना कि यदि किरायेदार की बेदखली नहीं रोकी गई, तो ऊपरी अदालत (DRAT) में अपील करने का उनका अधिकार निरर्थक हो जाएगा।
याचिकाकर्ता मूल मकान मालिकों (प्रतिवादी 2 और 3) के यहां एक किरायेदार है। किरायेदारी की अवधि के दौरान ही मूल मकान मालिकों ने इस संपत्ति को अन्य लोगों (प्रतिवादी 4 और 5) को बेच दिया था।
महत्वपूर्ण बात यह कि इस बिक्री विलेख (सेल डीड) में भी याचिकाकर्ता का नाम बतौर किरायेदार स्पष्ट रूप से दर्ज था। इसके बावजूद नए खरीदारों (प्रतिवादी 4 और 5) ने इस संपत्ति को आईडीबीआई बैंक के पास गिरवी रख दिया।
जब नए मालिकों का कर्ज खाता एनपीए संपत्ति घोषित हो गया, तो बैंक ने सरफेसी अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी। बैंक ने सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत आदेश प्राप्त कर लिया और संपत्ति का भौतिक कब्जा लेने का नोटिस जारी कर दिया।
इस बेदखली के खिलाफ याचिकाकर्ता ने कर्ज वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) में धारा 17 के तहत आवेदन किया। बेदखली की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने के लिए एक अंतरिम आवेदन भी दायर किया गया, लेकिन डीआरटी ने 24 जून 2026 को उसे खारिज कर दिया।