बैंक की नीलामी में 'खेल'! हाई कोर्ट ने रद्द की IDBI की ई-नीलामी, 2 मिनट की गड़बड़ी बैंक को पड़ी भारी

Nagpur High Court: ई-नीलामी में तकनीकी गड़बड़ी पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! आईडीबीआई बैंक की नीलामी रद्द, अब 16.11 करोड़ से शुरू होगी बोली। लापरवाही पर 21 लाख का जुर्माना।
Nagpur High Court cancels IDBI Bank's e-auction due to technical glitches. New auction ordered with a higher base price of ₹16.11 Cr to protect public funds.
ई-नीलामी में तकनीकी गड़बड़ी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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IDBI Bank E-Auction: बैंकों में बतौर गारंटी कई बार सम्पत्तियां रखी जाती हैं। कर्जदारों द्वारा कर्ज की अदायगी नहीं किए जाने पर बैंकों की ओर से इनकी नीलामी की जाती है। वर्तमान में बैंकों द्वारा ई-नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जा रही है किंतु इसमें तकनीकी खामियों के चलते कई बार बोलीकर्ता को न्याय नहीं मिल पाता है।

इसी तरह का विवाद हाई कोर्ट में उस समय देखा गया जब याचिकाकर्ता ने पुन: ई-नीलामी करने के आदेश बैंक को देने का अनुरोध कोर्ट से किया। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने सार्वजनिक निधि के संभावित नुकसान को देखते हुए 1 दिसंबर 2025 को हुई ई-नीलामी की बिक्री पुष्टि को रद्द कर दिया और इसे उच्च आधार मूल्य के साथ फिर से शुरू करने का आदेश दिया।

2 मिनट में प्रक्रिया समाप्त

आईडीबीआई बैंक ने सरफेसी एक्ट के तहत 15 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य पर संपत्तियों की ई-नीलामी 1 दिसंबर 2025 को आयोजित की थी। इस नीलामी प्रक्रिया में याचिकाकर्ता राहुल चैनसुख संचेती और प्रतिवादी नंबर 10 (मेसर्स जीणमाता कॉट फाइबर प्राइवेट लिमिटेड) ने हिस्सा लिया था। नीलामी के दौरान अंतिम बोली प्रतिवादी नंबर 10 द्वारा 15 करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपये लगाई गई थी। याचिकाकर्ता राहुल संचेती का आरोप था कि तकनीकी खराबी के कारण वे अपनी आगे की बोली नहीं लगा सके। उन्होंने 15.18 बजे सहायता डेस्क से संपर्क किया था जहां उन्हें दोबारा लॉगिन करके बोली लगाने की सलाह दी गई लेकिन इसके 2 मिनट बाद ही 15.20 बजे नीलामी प्रक्रिया को समाप्त घोषित कर दिया गया।

कोर्ट का दखल और सीलबंद बोली

यद्यपि बैंक द्वारा नियुक्त तकनीकी विशेषज्ञ की रिपोर्ट में सिस्टम में किसी भी खराबी होने से इनकार किया गया था लेकिन कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि 10 मिनट का एक्सटेंशन समय पूरा होने से पहले ही नीलामी बंद कर दी गई थी। ई-नीलामी का मुख्य उद्देश्य संपत्ति का अधिकतम बाजार मूल्य प्राप्त कर कर्ज की त्वरित वसूली करना होता है।

इसे ध्यान में रखते हुए और दोनों पक्षों की सत्यनिष्ठा परखने के लिए हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों से सीलबंद लिफाफे में अपनी-अपनी बोलियां प्रस्तुत करने को कहा था। कोर्ट में जब याचिकाकर्ता का लिफाफा खोला गया तो उन्होंने 16 करोड़ 11 लाख रुपये की बोली लगाई थी जो कि बैंक द्वारा स्वीकार की गई पिछली बोली से लगभग 90 लाख रुपये अधिक थी। वहीं प्रतिवादी नंबर 10 ने कोई नई बोली जमा नहीं की।

...तो 21 लाख रुपये का जुर्माना

सार्वजनिक निधि के नुकसान को बचाने के लिए अदालत ने पुरानी नीलामी प्रक्रिया को रद्द करते हुए उसी चरण से नीलामी दोबारा शुरू करने का आदेश दिया है। अब इस नीलामी का आधार मूल्य याचिकाकर्ता द्वारा बताई गई 16 करोड़ 11 लाख रुपये की राशि होगी। कोर्ट ने इस आदेश के साथ एक बेहद सख्त शर्त भी जोड़ी है।

अदालत ने कहा है कि यदि याचिकाकर्ता की बोली स्वीकार हो जाती है और वह नीलामी की शर्तों के अनुसार पैसा जमा करने में विफल रहता है तो इसे कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा। ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता को 21 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा जिसे यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की हाई कोर्ट शाखा स्थित 'पब्लिक वेलफेयर अकाउंट' में जमा कराना होगा।

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