
बेसा-पिपला का हर चौक-चौराहा बदहाल
Nagpur News: पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और सांसद श्याम बर्वे के निर्वाचन क्षेत्र बेसा-पिपला की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। दोनों ही नेताओं की उदासीनता का परिणाम है कि विकास योजनाएं निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं। कई परियोजनाएं विलंब से चल रही हैं, जिससे नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बेसा-पिपला मार्ग की खराब स्थिति को लेकर कई बार आवाज उठाई गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। हाल ही में गड्ढों में गिरकर एक नागरिक की मौत हो गई, जिसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि सड़क निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ नहीं हुआ, तो वे आगामी चुनावों में मतदान नहीं करेंगे। इन्हीं मांगों को लेकर नागरिकों का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी विपिन इटनकर से मिला और मृतक परिवार को मुआवजा देने के साथ-साथ अधूरे विकास कार्यों को जल्द पूरा करने की मांग की।
नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को लंबे समय से इस मार्ग की स्थिति के बारे में सूचित किया जा रहा था। स्थानीय नगर पंचायत को भी जानकारी दी गई थी, लेकिन विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। नतीजा यह हुआ कि यह मार्ग अब “मौत का गड्ढा” बन गया है।
आश्चर्य की बात यह है कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद भी क्षेत्र के सांसद और विधायक न तो घटनास्थल पर पहुंचे और न ही कोई ठोस कदम उठाया। नागरिकों का आरोप है कि उन्हें “लावारिस” छोड़ दिया गया है। जब कोई विकास कार्य पूरा होता है, तो श्रेय लेने की होड़ मच जाती है, लेकिन हादसों के समय कोई पूछने नहीं आता।
नागरिकों का कहना है कि कार्य चाहे किसी भी फंड से पूरा किया जाए, उन्हें केवल उसका समापन चाहिए। बहाने बनाकर नेता और अधिकारी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। अगर यही स्थिति जारी रही, तो क्षेत्र के लोग आगामी स्थानीय चुनावों में मतदान नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न नहीं होता।
नागरिकों ने बताया कि सांसद रामटेक में और विधायक कामठी में रहते हैं, जिससे संपर्क करना कठिन होता है। दोनों ही अपने क्षेत्रों में बहुत कम दिखाई देते हैं। आम नागरिकों के लिए छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान हेतु बार-बार रामटेक या कामठी जाना संभव नहीं होता, इसलिए कार्य अटक जाते हैं। नेताओं की उदासीनता के कारण क्षेत्र का विकास अव्यवस्थित हो गया है। जहां-तहां अनियोजित निर्माण और अतिक्रमण का बोलबाला है। सड़कें दुकानों से भरी हैं, वाहन चलाना भी मुश्किल हो गया है।
बेसा टी-पॉइंट के सभी कोने टूटे हुए हैं। वाहन चालक अपने वाहनों को संभालने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। टू-व्हीलर चालक आए दिन गिरते हैं और घायल हो रहे हैं, लेकिन अधिकारी तब तक मरम्मत नहीं कराते जब तक शिकायत न हो।
मनीषनगर टी-पॉइंट (पुरुषोत्तम स्टोर्स के पास) से बेसा की ओर जाने वाला मार्ग बनने के बावजूद बड़े गड्ढे बने हुए हैं, जो वाहन चालकों के लिए खतरा साबित हो रहे हैं। इसी तरह रामेश्वरी और मनीषनगर से टी-पॉइंट की ओर जाने वाले मार्गों पर भी गड्ढों की स्थिति भयावह है। सीमेंट रोड से उतरते समय वाहन का संतुलन बिगड़ जाता है और गिरने की आशंका रहती है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
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टी-पॉइंट से बेसा तक सड़क चौड़ीकरण का कार्य पिछले दो वर्षों से अधूरा पड़ा है। कुछ स्थानों पर 5-5 फीट चौड़ी सड़क बना दी गई है, जबकि बीच-बीच में बड़े गड्ढे छोड़ दिए गए हैं। न बैरिकेड हैं, न ही साइनबोर्ड। तेज रफ्तार में वाहन चालक अक्सर संतुलन खो देते हैं और दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। कहीं पेड़ बीच सड़क में खड़े हैं, तो कहीं अधूरे निर्माण का दंश लोग झेल रहे हैं। नेताओं और अधिकारियों की उदासीनता के चलते जनता पूरी तरह परेशान है।






