लैंगिक समानता केवल सामाजिक विचार नहीं, सुशासन की आवश्यकता - डॉ. नीलम गोर्हे

Neelam Gorhe: मुंबई में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार में डॉ. नीलम गोर्हे ने कहा कि लैंगिक समानता केवल सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि सुशासन और सतत विकास के लिए आवश्यक है।
महिला सशक्तिकरण, एसडीजी लक्ष्य, वेबिनार मुंबई, gender equality India, Neelam Gorhe speech
gender justice webinar (सोर्सः सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Gender Justice Webinar Mumbai: सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकना और उन्हें पर्याप्त संसाधन व तकनीक उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ये विचार महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति कार्यालय और स्त्री आधार केंद्र द्वारा आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार में विशेषज्ञों ने व्यक्त किए।

कानूनी सुधार और सशक्त न्यायपालिका जरूरी

महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोर्हे ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा के विभिन्न रूपों से निपटने के लिए कानूनी सुधार और न्यायपालिका का सशक्तिकरण आवश्यक है। उन्होंने विकास और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सूक्ष्म और व्यापक स्तर पर कार्यनीति तैयार करने पर जोर दिया। सांसद डॉ. डी. पुरंदेश्वरी ने ‘निर्भया’ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर बजटीय प्रावधानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

कानूनी सुरक्षा और वैश्विक दृष्टिकोण

सुरमा पाधी ने महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा अधिकारों को कानूनी रूप से मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। लंदन से रेणुका फड़के ने आर्थिक साक्षरता और सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों के महत्व को रेखांकित किया। वहीं डॉ. पैम राजपूत ने सीडॉ (CEDAW) के माध्यम से भेदभाव मुक्त व्यवस्था की आवश्यकता बताई। विशेष पुलिस महानिरीक्षक दत्तात्रय कराले ने पुलिस बल को लैंगिक हिंसा और मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने के प्रशिक्षण पर प्रकाश डाला।

जमीनी अनुभव और निष्कर्ष

पुणे की अंजू वाघमारे और लहानु आबनावे ने ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के संघर्ष और अनुभव साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत अपर्णा पाठक ने की, जबकि आभार प्रदर्शन मुग्धा केसकर ने किया। वेबिनार में यह निष्कर्ष निकला कि जब तक महिलाएं सुरक्षित और सशक्त नहीं होंगी, तब तक सतत विकास के लक्ष्य अधूरे रहेंगे।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com