नागपुर आपली बस विवाद: नियमों को बाईपास कर कंपनी को भुगतान, परिवहन विभाग में वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा

Nagpur Transport Irregularities: नागपुर की आपली बस सेवा में अतिरिक्त 220 बसों के भुगतान को लेकर नियमों की अनदेखी के आरोप लगे हैं। नोटशीट के आधार पर मंजूरी और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
Nagpur 'Aapli Bus' Controversy: Payment made to company by bypassing rules; financial irregularities in the Transport Department exposed.
नागपुर आपली बस, परिवहन विभाग,(सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nagpur Aapli Bus Payment Controversy: नागपुर परिवहन विभाग भले ही आपली बस के माध्यम से जनता को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने का दावा कर रहा हो लेकिन 720 बसों के बेड़े के संचालन से जहां बस ऑपरेटर्स और नियंत्रण तथा संचालन संभाल रही कंपनियां मालामाल हो रही हैं वहीं परिवहन विभाग कंगाली की दिशा में बढ़ता जा रहा है।

आश्चर्यजनक यह है कि नियमों को ताक पर रखकर परिवहन विभाग के अधिकारी समिति के सामने प्रस्ताव पेश कर रहे हैं, जबकि समिति भी बिना को सवाल किए इन प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान कर रही है।

इसका जीता जागता उदाहरण उस समय देखने को मिला जब मंगलवार को हुई परिवहन समिति की बैठक में पेश किए गए कई प्रस्तावों को हरी झंडी प्रदान की गई नोटशीट के आधार पर कंपनियों को भुगतान रू उल्लेखनीय है कि आपली बस के संचालन के लिए चलो एप नामक कंपनी के साथ परिवहन विभाग द्वारा एग्रीमेंट किया गया था।

220 अतिरिक्त बसों का भुगतान, मंजूरी बिना हुआ?

500 बसों के संचालन के लिए आवश्यकता के अनुसार कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, साथ ही उसके भुगतान का फॉर्मूला भी तय किया गया था। समय के साथ राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से मिली वित्तिय मदद के चलते आपसी बस का बेड़ा वर्तमान में 720 तक पहुंच गया है जिसके चलते एग्रीमेंट के अनुसार 220 अतिरिक्त बसों की आवश्यकता के लिए निधि का प्रावधान करना जरूरी था।

किंतु आश्चर्यजनक ढंग से परिवहन विभाग ने केवल नोटशीट के जरिए कंपनी को भुगतान का रास्ता बना लिया, जबकि नियमों के अनुसार चूंकि प्रकल्प की निधि बढ़ गई तो उसे प्रशासन या मनपा की सभा से मंजूरी लेनी अनिवार्य थी। आलम यह है कि नियमों के प्रावधान और प्रशासन द्वारा लिए गए निर्णय की जानकारी प्रशासन द्वारा समिति को भी नहीं दी गई।

मनपा को मिल रहे मात्र 1,500 रुपए

साईन पोस्ट कंपनी भले ही प्रति माह बस शेल्टर पर विज्ञापनों के माध्यम से करोड़ों रुपए कमा रही हो लेकिन आलम यह है कि मनपा को प्रति बस शेल्टर केवल 1,500 रुपए दिए जा रहे हैं। आश्चर्यजनक यह है कि महंगाई के इस दौर में हर वस्तु के दाम तो बढ़ गए लेकिन मनपा के हिस्से में आने वाला लाभांश नहीं बढ़ पाया है।

यहां तक कि इस संदर्भ में नागपुर मनपा के परिवहन विभाग द्वारा कोई समीक्षा नहीं की गई। इसके विपरीत द्वारा अपनी जिम्मेदारी का वहन नहीं किए जाने के बावजूद उसके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई तक प्रस्तावित नहीं की जा रही है जिससे दाल में कुछ काला होने की संभावना जताई जा रही है।

साईन पोस्ट कंपनी की लापरवाही भी नजरअंदाज

जानकारी के अनुसार परिवहन व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए मनपा की ओर से सिटी के अलग-अलग हिस्सों में बस शेल्टर तैयार करने का निर्णय लिया गया था। इसके तहत 242 बस शेल्टर तैयार किए गए। बस शेल्टर के लिए निकाले गए टेंडर के बाद इसकी जिम्मेदारी साईन पोस्ट कंपनी को दी गई। एग्रीमेंट के अनुसार बस शेल्टर में विज्ञापन करने के अधिकार कंपनी को दिए गए।

इसके बदले मनपा को कुछ राजस्व मिलना था, साथ ही बस शेल्टर में एलईडी डिस्प्ले और अनाउन्समेंट सिस्टम लगाने तथा विकलांगों के लिए रैम्प तैयार करने थे। आश्वर्यजनक यह है कि एग्रीमेंट के अनुसार कंपनी की ओर से यह कुछ भी नहीं किया गया, जबकि कार्यकाल खत्म होने को केवल कुछ समय बचा है। इस लापरवाही के लिए कंपनी पर किसी तरह का जुर्माना तक नहीं लगाया गया, उल्टे कंपनी का बचाव किया जा रहा है।

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