सुप्रिया सुले समर्थन करें तो अच्छा है वरना पश्चिम बंगाल जैसा होगा हाल, परिसीमन बिल पर एकनाथ शिंदे का बड़ा बयान

Eknath Shinde Statement Delimitation Bill: उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने परिसीमन बिल पर सुप्रिया सुले को घेरा है और शिवसेना में सांसदों की बगावत पर भी प्रतिक्रिया दी है।
Eknath Shinde Supriya Sule
एकनाथ शिंदे और सुप्रिया सुले (फोटो क्रेडिट-X)
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Eknath Shinde On Supriya Sule: महाराष्ट्र की राजनीति में जारी भारी उथल-पुथल के बीच देश के बहुचर्चित परिसीमन बिल पर शरद पवार गुट के संभावित समर्थन की अटकलों को लेकर राज्य के उप मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे का एक बेहद बड़ा और तल्ख बयान सामने आया है। एकनाथ शिंदे ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले इस बिल पर सरकार का समर्थन करती हैं, तो यह एक अच्छा कदम होगा, लेकिन फिलहाल उनका पूरा 'इंडिया' (I.N.D.I.A.) गठबंधन इस मुद्दे पर पूरी तरह से असमंजस की स्थिति में है।

शिंदे ने तंज कसते हुए आगे कहा कि विपक्ष को अंततः इस बिल का समर्थन करना ही पड़ेगा, क्योंकि यदि वे महिला आरक्षण और परिसीमन का विरोध करते हैं, तो खुद देश की जनता उनके खिलाफ खड़ी हो जाएगी और विपक्ष का हाल भी पश्चिम बंगाल जैसा हो जाएगा। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि यह बिल हर हाल में पास होकर रहेगा।

6 सांसदों की बगावत पर शिंदे का 'पक्का काम'

इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एकनाथ शिंदे के साथ उद्धव ठाकरे गुट को छोड़कर हाल ही में शिवसेना में शामिल हुए चार बागी सांसद भी मंच पर मौजूद थे। उद्धव गुट में हुई इस बड़ी सेंधमारी और सांसदों की बगावत पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए शिंदे ने विरोधियों को करारा जवाब दिया।

उन्होंने गर्व से कहा, "शिवसेना (उद्धव गुट) के 6 सांसद दो-तिहाई बहुमत के साथ हमारे पाले में आ चुके हैं। इन सभी सांसदों ने खुद लोकसभा स्पीकर के पास जाकर अपनी पूरी कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया है। अब संसद के भीतर हमारी शिवसेना का संख्याबल और वास्तविक बहुमत काफी बढ़ चुका है। हम जो भी राजनीतिक काम करते हैं, वह पूरी तरह से पक्का ही करते हैं, यह तो आप लोगों ने पहले भी हमारे काम करने के तरीके में देखा ही होगा।"

जयंत पाटिल और फडणवीस की मुलाकात पर विरोधियों को 'जमालघोटा'

वहीं दूसरी ओर, शरद पवार गुट के दिग्गज नेता जयंत पाटिल की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ 'वर्षा' बंगले पर देर रात हुई सीक्रेट मीटिंग को लेकर चल रहे कयासों पर भी शिंदे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "नेताओं की हर मुलाकात का मतलब केवल राजनीतिक सौदेबाजी नहीं होता। जब खुद शरद पवार हमसे मिलने आते हैं, तो कई लोगों के पेट में बिना वजह ही तेज दर्द होने लगता है। कुछ लोगों की हालत तो ऐसी हो जाती है जैसे उन्होंने 'जमालघोटा' पी लिया हो।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय साथी हैं, और भविष्य में किस नए दल को एनडीए गठबंधन में शामिल करना है या नहीं, इसका अंतिम और सर्वोच्च फैसला केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ही करेंगे।

फिलहाल कोई वेकेंसी नहीं है

प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिरी दौर में जब एकनाथ शिंदे से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की दावेदारी और दोनों उप मुख्यमंत्रियों के बीच की खींचतान को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़ी सहजता से स्थिति साफ की। शिंदे ने कहा, "महाराष्ट्र में इस समय मुख्यमंत्री पद के लिए कोई भी वेकेंसी नहीं है। यह बेहद स्वाभाविक है कि हर राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं की यह दिली इच्छा होती है कि उनकी अपनी पार्टी का नेता ही सूबे का मुख्यमंत्री बने। जब मैं राज्य का मुख्यमंत्री था, तब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगता था कि देवेंद्र जी को मुख्यमंत्री होना चाहिए, हम इन बातों का कभी भी बुरा नहीं मानते हैं।"

उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि आज देवेंद्र फडणवीस राज्य के मुख्यमंत्री हैं और वे खुद उप मुख्यमंत्री के रूप में पूरी निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं, क्योंकि महायुति सरकार का एकमात्र साझा एजेंडा केवल महाराष्ट्र का चौतरफा विकास करना है।

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