

Nagpur Aapli Bus Fleet: नागपुर शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मनपा की 'आपली बस' के बेड़े ने 700 बसों का आंकड़ा पार कर लिया। जून महीने में 250 उन्नत इलेक्ट्रक बसों की आखिरी खेप प्राप्त होने के साथ ही यह उपलब्धि हासिल हुई है।
इस नई शुरुआत के बाद 'आपली बस' प्रणाली के तहत अब कुल 730 बसें 9 विभिन्न डिपो से संचालित हो रही हैं जो प्रति दिन शहर भर में लगभग 8,000 फेरे (ट्रिप्स) लगा रही हैं। बेहतरीन और सुरक्षित सेवाओं के कारण 'आपली बस' में हर दिन सफर करने वाले यात्रियों की संख्या भी 2 लाख तक पहुंच गई है।
इस दूरदर्शी योजना को मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा वित्तिय मदद की गई है और इसे राज्य सरकार द्वारा सक्रिय रूप से समर्थन प्राप्त है। इलेट्रिक बसों के बेड़े में शामिल होने से अब शहर की पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली 195 डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का रास्ता साफ हो गया है।
इन डीजल बसों में 150 स्टैंडर्ड (32-सीटर) और 45 छोटी (20-सीटर) बसें शामिल हैं। मनपा की नीति के अनुसार, सार्वजनिक परिवहन के वाहन 15 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद सेवा से हटा दिए जाते हैं। 'ऑरेंज सिटी' के लिए स्वच्छ हवा और बेहतर भविष्य जीरो उत्सर्जन वाले इन नए वाहनों के भारी संख्या में सड़कों पर उतरने से फॉसिल फ्यूल से चलने वाले वाहन धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं।
इसके परिणामस्वरूप शहरी वायु प्रदूषण और वाहनों के उत्सर्जन में स्थायी रूप से भारी कमी आ रही है। यह महत्वपूर्ण बदलाव ऑरेंज सिटी को एक स्वस्थ, सांस लेने योग्य और सही मायनों में टिकाऊ (सस्टेनेबल) वातावरण की ओर ले जा रहा है।
परिवहन विभाग के अनुसार प्राप्त हुई नई 250 ई-बसों में से 140 बसों को वाठोड़ा डिपो में और 110 बसों को खापरी डिपो में तैनात किया गया है। हालांकि इस सफलता के रास्ते में कुछ प्रशासनिक और बुनियादी बाधाएं भी आई थीं। 14 जुलाई 2025 को शुरू हुई इस हाई-कैपेसिटी ई-बस पहल के शुरुआती चरण के बाद खापरी और वाठोड़ा डिपो में बिजली की लाइन का काम अधूरा होने के कारण लगभग 150 बसें डिपो में ही खड़ी रह गई थीं।
नागरिक प्रशासन ने इन उन्नत वाहनों को खराब मौसम से बचाने के लिए आगे की डिलीवरी को कुछ समय के लिए रोक दिया था। बाद में राज्य नेतृत्व और इंजीनियरों के कड़े प्रयासों के बाद पेंडिंग बिजली ग्रिड (पावर ग्रिड) को पूरी तरह से चालू कर दिया गया जिससे ये पर्यावरण-अनुकूल बसें सीधे डिपो से निकलकर सड़कों पर आ सकीं।