
Sushil Raheja Case Mumbai (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Vanchit Bahujan Aghadi Activists Arrest: मुंबई के प्रसिद्ध बिल्डर सुशील रहेजा प्रकरण में वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर अदालत ने पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को ‘बेकायदेशीर’ (अवैध) करार दिया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत के इस रुख के बाद सभी हिरासत में लिए गए ‘वंचित’ कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
यह मामला बिल्डर सुशील रहेजा के खिलाफ किए गए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है, जिसमें पुलिस पर सत्ता के दबाव में आकर कार्रवाई करने के आरोप लग रहे थे।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस ने वंचित बहुजन आघाड़ी के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करते समय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि बिना किसी ठोस आधार या उचित कानूनी प्रक्रिया के नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को छीनना कानून का उल्लंघन है। अदालत ने पुलिस से पूछा कि किस आधार पर और किन नियमों के तहत इन कार्यकर्ताओं को हिरासत में रखा गया था। पुलिस द्वारा संतोषजनक जवाब न मिलने पर अदालत ने पुलिस की इस कार्रवाई को अनुचित और अवैध बताया।
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बिल्डर सुशील रहेजा पर दलित और वंचित वर्ग की जमीन से संबंधित विवादों और कुछ अनधिकृत निर्माणों के आरोप लगाते हुए वंचित बहुजन आघाड़ी ने मोर्चा खोला था। प्रकाश अंबेडकर के नेतृत्व वाली इस पार्टी का आरोप है कि रहेजा जैसे बड़े बिल्डरों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने ‘वंचित’ के कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। पार्टी का दावा था कि वे केवल शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित करने के लिए गिरफ्तार किया गया।
अदालत के फैसले के बाद वंचित बहुजन आघाड़ी के खेमे में खुशी की लहर है। कार्यकर्ताओं की रिहाई को पार्टी अपनी ‘नैतिक और कानूनी जीत’ मान रही है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि यह फैसला उन अधिकारियों के लिए सबक है जो सत्ताधारियों के इशारे पर काम करते हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर मुंबई में बिल्डरों और भू-विवादों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कार्यकर्ताओं ने रिहा होते ही ‘जय भीम’ के नारों के साथ अपना संकल्प दोहराया कि वे बिल्डरों के अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।






