
मुंबई के बोरीवली नेशनल पार्क में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस और वन विभाग की टीम पर हमला (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sanjay Gandhi National Park Encroachment Dispute: मुंबई के बोरीवली स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क (SGNP) में 27 जनवरी को उस समय हिंसक झड़प देखने को मिली जब वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंची। बॉम्बे हाईकोर्ट के पुराने आदेशों के क्रियान्वयन के दौरान स्थानीय निवासियों के विरोध ने उग्र रूप ले लिया, जिससे इलाके में भारी तनाव फैल गया।
संजय गांधी नेशनल पार्क क्षेत्र में अवैध कब्जे हटाने की प्रक्रिया मंगलवार सुबह शुरू हुई। जैसे ही टीम ने कार्रवाई तेज की, वहां मौजूद भीड़ ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन हिंसा में बदल गया और कुछ असामाजिक तत्वों ने सुरक्षा बलों और वन विभाग के कर्मचारियों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस अचानक हुए हमले से वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत मोर्चा संभाला और अतिरिक्त बल की मदद से इलाके की घेराबंदी कर स्थिति को नियंत्रण में लिया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके से कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
On 26 jan 2026 The atmosphere became tense when local residents pelted stones at a team of forest department and police who arrived to remove illegal encroachments in #Mumbai‘s Sanjay Gandhi National Park, Borivali. pic.twitter.com/cNSgvQkNdO — Siraj Noorani (@sirajnoorani) January 27, 2026
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए संजय गांधी नेशनल पार्क प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। प्रशासन द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार, 27 जनवरी को पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार पर्यटकों और आम नागरिकों के लिए पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लिया गया। डिप्टी डायरेक्टर (साउथ) ने स्पष्ट किया कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और शांतिपूर्ण तरीके से कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जनता का सहयोग अनिवार्य है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।
यह कार्रवाई कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह 1997 में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि नेशनल पार्क की वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाना चाहिए। नियमों के मुताबिक, केवल उन्हीं परिवारों को पुनर्वास का लाभ मिलना था जिनके नाम 1995 की मतदाता सूची में थे। इसी योजना के तहत अब तक 11,000 से अधिक पात्र परिवारों को चांदिवली और पवई जैसे क्षेत्रों में आवास आवंटित किए जा चुके हैं। प्रशासन का तर्क है कि मौजूदा कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ है जो नियमों का उल्लंघन कर दोबारा जमीन कब्जा रहे हैं।
यह भी पढ़ें:- मीरा-भाईंदर में अजुबा… 4 लेन से अचानक 2 लेन हो गया फ्लाईओवर! सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के बाद MMRDA ने दी सफाई
जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि लगभग 385 ऐसे परिवार, जिन्हें पहले ही चांदिवली में घर मिल चुके थे, उन्होंने फिर से नेशनल पार्क की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। प्रशासन ने इसे सरकारी योजनाओं का खुला दुरुपयोग करार दिया है। हालांकि, कुछ लोग स्वयं को आदिवासी बताकर इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने कोर्ट के पिछले फैसलों का हवाला देते हुए इन दावों को खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक योजना का दुरुपयोग करने वालों को हटाया नहीं जाएगा, तब तक वास्तव में पात्र और जरूरतमंद परिवारों को उनका हक नहीं मिल पाएगा।






