
सांकेतिक तस्वीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
मुंबई: बोरीवली के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवों के रखरखाव की लागत को पूरा करने के लिए एक वन्यजीव गोद लेने की योजना लागू की गई है। हालांकि इस योजना में कई मशहूर हस्तियों और आम पशु प्रेमियों ने भाग लिया है। जानवरों को गोद लेने के लिए आगे आने वाले लोगों की संख्या बहुत बड़ी है, लेकिन वर्तमान में पार्क में 2 बाघ और 1 तेंदुआ अभी भी गोद लेने वालों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
राष्ट्रीय उद्यान में पिंजरे में बंद जानवरों के संरक्षण के लिए प्रशासन द्वारा 2014 में वन्यजीव गोद लेने की योजना शुरू की गई थी। इसके तहत प्रशासन पिंजरे में बंद जानवरों बाघ, तेंदुए, शेर और नीलगाय को सफारी, रेस्क्यू सेंटर और दर्शन पिंजरों में कैद पशुओं को गोद लेने की अपील की थी। योजना के मुताबिक एक बाघ को एक साल के लिए 3 लाख 10 हजार रुपए देकर गोद लिया जा सकता है। गोद लेने वाले को पूरे साल जानवर के भोजन और उपचार का खर्च वहन करना होता है।
वर्तमान में पार्क में 8 बाघ, 20 तेंदुए, 2 शेर, और 1 नीलगाय को गोद लिया गया है। अभी 2 बाघ और 1 तेंदुआ गोद लेने वालों का इंतजार कर रहे हैं। इससे पहले मंत्री केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने संजय गांधी नेशनल पार्क से एक तेंदुए को गोद लिया था। इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता साधना वाजे ने कई वर्षों के लिए एक तेंदुए को गोद लिया है।
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इसके साथ ही विधायक प्रताप सरनाईक, अभिनेता सुमित राघवन ने भी जानवरों को गोद लिया है। साथ ही 2021 में गोद लेने की योजना में डायरेक्टर श्याम बेनेगल भी शामिल थे। इस बीच एक अधिकारी ने बताया कि वे गोद लेने का समझौता खत्म होने के बाद इसे नवीनीकृत करने के बारे में सोच रहे हैं।
मानव शृंखला में अहम भूमिका निभाने वाले जंगली जानवरों से शहरवासियों की नजदीकी बढ़ाने, जंगली जानवरों के भोजन और इलाज का खर्च वहन करने के उद्देश्य से गोद लेने की योजना शुरू की गई है। वन्यजीव दत्तक ग्रहण योजना के तहत संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से वन्यजीव प्रजातियों को एक साल के अनुबंध पर अपनाया जा सकता है।
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गोद लेने वाले को पूरे साल जानवर के भोजन और उपचार का खर्च वहन करना होगा। इसके अलावा, यदि किसी जंगली जानवर को गोद लिया जाता है तो संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान उस व्यक्ति को उसकी संरक्षकता की स्वीकृति का प्रमाण पत्र देना होता है। जानवर के पिंजरे के पास गोद लेने वाले के नाम की एक पट्टिका लगाई जाती है। साथ ही परिवार के साथ सप्ताह में एक बार पशु का नि:शुल्क निरीक्षण किया जा सकता है।
इस योजना के तहत शेर, बाघ, तेंदुआ, नीलगाय, भेड़, सांभर और चीतल वन्यजीवों को गोद लिया जा सकता है। योजना के अनुसार बाघ को 3 लाख 10 हजार रुपए, शेर को 3 लाख रुपए, तेंदुए को 1 लाख 20 हजार रुपए, नीलगाय को 30 हजार रुपए और हिरण को 20 हजार रुपए देकर गोद लिया जा सकता है।






