
एकनाथ शिंदे व देवेंद्र फडणवीस (डिजाइन फोटो)
BMC Mahayuti Rift: बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव के नतीजों के बाद अब असली लड़ाई सत्ता की कुर्सी के लिए शुरू हो गई है। किसी भी दल को बहुमत न मिलने के कारण 29 सीटों वाली एकनाथ शिंदे की शिवसेना अब ‘किंगमेकर’ की भूमिका में है।, हालांकि, पार्टी द्वारा अपने पार्षदों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने से गठबंधन में संकट गहरा गया है।
बीएमसी चुनाव के नतीजों ने मुंबई की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। मंगलवार को स्थिति तब और गंभीर हो गई जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अपने 29 नवनिर्वाचित पार्षदों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) अचानक रद्द कर दिया। पार्टी मुख्यालय पहुंचे पार्षद उस समय हैरान रह गए जब उन्हें सूचना मिली कि उनका पंजीकरण फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। राजनीतिक हलकों में इस कदम को भाजपा के साथ चल रही सत्ता की खींचतान और दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों का दावा है कि महायुति गठबंधन के भीतर विवाद की मुख्य वजह सत्ता का बंटवारा है। विशेष रूप से मुंबई के मेयर पद और बीएमसी की सबसे शक्तिशाली ‘स्थायी समिति’ (Standing Committee) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भाजपा और शिंदे गुट के बीच आम सहमति नहीं बन पा रही है। 227 वार्डों वाली बीएमसी में जब तक शिंदे सेना का समर्थन नहीं मिलता, तब तक बहुमत का आंकड़ा जुटाना मुश्किल है। इसी ‘किंगमेकर’ वाली ताकत का इस्तेमाल करते हुए शिंदे गुट अपनी मांगें मनवाने की कोशिश कर रहा है।
गठबंधन में बढ़ते तनाव के संकेत तब और पुख्ता हो गए जब एकनाथ शिंदे ने निर्धारित कैबिनेट बैठक से दूरी बना ली। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ होने वाली इस महत्वपूर्ण चर्चा में शामिल होने के बजाय शिंदे अपने पैतृक गांव ‘दरे’ (सतारा) चले गए। वहां उन्होंने स्थानीय रैलियों में हिस्सा लिया, जिसे विश्लेषक भाजपा नेतृत्व के लिए एक ‘सख्त संदेश’ मान रहे हैं। शिंदे का यह रुख दर्शाता है कि वे बीएमसी में सत्ता की साझेदारी को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं।
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15 जनवरी को हुए चुनावों में किसी भी पार्टी को जादुई आंकड़ा 114 हासिल नहीं हुआ है। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
• भाजपा: 89 सीटें
• शिवसेना (UBT): 65 सीटें
• शिवसेना (शिंदे गुट): 29 सीटें,
• कांग्रेस: 24 सीटें
• MNS: 6 सीटें
भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी तो है, लेकिन बिना शिंदे सेना के 29 पार्षदों के समर्थन के वह सत्ता से दूर है। वहीं, उद्धव ठाकरे गुट भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, जिससे मुंबई की राजनीति आने वाले दिनों में और भी दिलचस्प हो सकती है।






