
AIMIM पार्षद सहर शेख व असदुद्दीन ओवैसी (सोर्स: सोशल मीडिया)
AIMIM Councilor Sahar Sheikh Statement: महाराष्ट्र की सभी 29 महानगरपालिकाओं में मेयर चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ठाणे में 131 सीटों के लिए हुए चुनाव में शिव सेना ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) की युवा पार्षद सहर शेख के ताजा बयान ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।
15 जनवरी को हुए ठाणे महानगरपालिका (TMC) के चुनावों में राजनीतिक समीकरण काफी दिलचस्प रहे हैं। कुल 131 सीटों वाली इस महानगरपालिका में बहुमत के लिए 66 सीटों की आवश्यकता है। प्राप्त नतीजों के अनुसार, शिव सेना ने 75 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि भाजपा को 28 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 5 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज कराई है। इसके अलावा एनसीपी (SP) को 12 और एनसीपी को 9 सीटें मिली हैं।
भले ही शिव सेना के पास पर्याप्त आंकड़ा मौजूद है, लेकिन विपक्षी खेमे और अन्य दलों के बीच गठबंधन की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। इस बीच, जब AIMIM की युवा पार्षद सहर शेख से उनके समर्थन के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कोई भी स्पष्ट संकेत देने से इनकार कर दिया। सहर शेख ने कहा कि समर्थन के विषय में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और इसकी जानकारी जल्द ही साझा की जाएगी। उन्होंने यह भी साझा किया कि AIMIM के सभी विजयी उम्मीदवारों ने अपना पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) करा लिया है और वे अब जनसेवा के काम में जुटने के लिए उत्साहित हैं।
सहर शेख अपने पिछले ‘हरे रंग’ वाले बयान को लेकर काफी चर्चा में रही थीं। इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि हरा रंग उनकी पार्टी की पहचान है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि उनकी पार्टी का रंग भगवा होता, तो वह भगवा की बात करतीं। उन्होंने उन सभी लोगों का धन्यवाद किया जिन्होंने उनके ‘मुंब्रा विजन’ को समझा और विवादों के बजाय उनके काम का समर्थन किया। सहर शेख के अनुसार, उनकी प्राथमिकता मुंब्रा का विकास और अपनी पार्टी के विजन को धरातल पर उतारना है।
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ठाणे सहित महाराष्ट्र की सभी महानगरपालिकाओं के लिए 22 जनवरी को आरक्षण की स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। वर्तमान में सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार, मेयर पद के लिए वास्तविक तस्वीर फरवरी के पहले सप्ताह तक साफ होने की उम्मीद है। हालांकि शिवसेना के पास 75 पार्षदों का समर्थन है, लेकिन मेयर चुनाव की प्रक्रिया और अन्य छोटे दलों की भूमिका इस पूरी राजनीतिक कवायद को और अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बना रही है।






