

Maharashtra First Woman Deputy CM Sunetra Pawar Political Career: महाराष्ट्र की राजनीति में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की नेता सुनेत्रा पवार ने राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। मुंबई के राजभवन में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। दिवंगत नेता अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का यह उत्थान न केवल एनसीपी के लिए, बल्कि राज्य की महिला राजनीति के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
18 अक्टूबर 1963 को जन्मी सुनेत्रा पवार का नाता हमेशा से राजनीतिक परिवारों से रहा है। उनके पिता बाजीराव और भाई पद्मसिंह पाटिल राजनीति के बड़े नाम रहे। 1983 में कॉमर्स से ग्रेजुएशन के बाद, 1985 में उनका विवाह अजित पवार के साथ हुआ। हालांकि, सालों तक वह पर्दे के पीछे रहकर सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहीं। उन्होंने 'एनवायर्नमेंटल फोरम ऑफ इंडिया' नामक एनजीओ के जरिए पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाई।
सुनेत्रा पवार की पहचान केवल एक 'नेत्री' की नहीं, बल्कि एक कुशल प्रबंधक की भी रही है। उन्होंने बारामती हाई-टेक टेक्सटाइल पार्क की चेयरपर्सन के रूप में हजारों महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। विद्या प्रतिष्ठान की ट्रस्टी और पुणे यूनिवर्सिटी की सीनेट मेंबर के तौर पर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी अमूल्य योगदान दिया।
सुनेत्रा पवार का सक्रिय चुनावी राजनीति में प्रवेश 2024 के लोकसभा चुनाव में हुआ। उन्होंने बारामती संसदीय सीट से अपनी ननद और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव लड़ा। हालांकि वह चुनाव हार गईं। इस हार के बाद अजित पवार की पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। 18 जून 2024 को उन्हें निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुना गया।
28 जनवरी अजित पवार के बाद निधन के बाद राष्ट्रावादी कांग्रेस पार्टी और महायुति सरकार में नेतृत्व संकट पैदा हो गया था। जिसके बाद एनसीपी के नेताओं ने किसी अन्य नेता को जिम्मेदारी सौंपने की बजाय अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को पार्टी का नेतृत्व सौंपने की निर्णय लिया। जिसके बाद आज यानी 31 जनवरी को ही एनसीपी विधयक दल की बैठक हुई, जिसमें सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुना गया। साथ हीसुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र विधानसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से विधायक दल के नेता के तौर पर व्हिप जारी करने और विधायी कामकाज करने के लिए सभी संवैधानिक अधिकार दिए गए हैं।