IISF 2025: MoES की ‘वन इनोवेशन’ प्रतियोगिता में महाराष्ट्र के छात्र अरजित मोरे राष्ट्रीय विजेता घोषित

IISF 2025 Winner: IISF 2025 के तहत MoES की ‘वन इनोवेशन’ प्रतियोगिता में महाराष्ट्र के छात्र अरजित मोरे ने अपने सौर नवाचार ‘इल्युम्ब्रेल्ला 2.0’ के साथ राष्ट्रीय स्तर पर जीत हासिल की है।
Arjit More innovation
One Innovation Challenge MoES (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Student Scientist Maharashtra: महाराष्ट्र के स्कूली छात्र अरजित अमोल मोरे को ‘वन इनोवेशन-टुवर्ड्स ए सेल्फ रिलायंट इंडिया’ प्रतियोगिता के तीन राष्ट्रीय विजेताओं में शामिल किया गया है। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2025 के अंतर्गत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) द्वारा MyGov के सहयोग से आयोजित की गई थी।

इस राष्ट्रव्यापी पहल की घोषणा केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने की थी। उन्होंने छात्रों, स्टार्टअप्स और युवा नवोन्मेषकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विज़न के अनुरूप व्यवहारिक, टिकाऊ और प्रभावी नवाचार प्रस्तुत करने का आह्वान किया था।

सौर नवाचार ‘इल्युम्ब्रेल्ला 2.0’ ने देशभर में खींचा ध्यान

देशभर से प्राप्त 1,062 प्रविष्टियों में से केवल तीन नवोन्मेषकों का चयन किया गया, जिनमें महाराष्ट्र से एकमात्र विजेता अरजित अमोल मोरे रहे। उनकी इस उपलब्धि से न केवल राज्य, बल्कि उनका विद्यालय स्वामी विवेकानंद हाई स्कूल, चेंबूर (मुंबई) भी गौरवान्वित हुआ है। अरजित मूल रूप से विदर्भ के वाशिम जिले के निवासी हैं। वे डॉ. होमी भाभा बालवैज्ञानिक स्वर्ण पदक से सम्मानित हैं और ‘लिटिल साइंटिस्ट’ के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। वे ‘जिज्ञासा: फ्रॉम क्यूरियोसिटी टू क्लैरिटी’ पुस्तक के लेखक हैं, जो सीएसआईआर–नेशनल केमिकल लेबोरेटरी (NCL), पुणे में उनके ‘वन डे ऐज़ ए साइंटिस्ट’ अनुभव से प्रेरित है।

बुनियादी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति

अरजित का विजयी नवाचार ‘इल्युम्ब्रेल्ला 2.0’ एक चलायमान सौर ऊर्जा आधारित प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से स्ट्रीट वेंडर्स, किसानों और घरेलू उपयोग के लिए विकसित किया गया है। यह एक छत्री-आधारित संरचना को पोर्टेबल सोलर यूनिट में परिवर्तित करता है, जिससे प्रकाश, मोबाइल चार्जिंग और बुनियादी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति होती है और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होती है।

यह नवाचार कम लागत, पोर्टेबिलिटी और व्यावहारिक उपयोगिता पर केंद्रित है, खासकर असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए। इल्युम्ब्रेल्ला अवधारणा पर अरजित द्वारा दो शोध पत्र भी प्रकाशित किए जा चुके हैं, जिनमें इसकी तकनीकी व्यवहार्यता और सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, वन इनोवेशन चैलेंज जैसे उपक्रम भारत के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र में स्कूल स्तर के नवोन्मेषकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं और यह प्रमाणित करते हैं कि छात्र-नेतृत्व वाला अनुसंधान और जमीनी स्तर का नवाचार देश के विकास लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

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