मिडिल ईस्ट में हाई अलर्ट,आदेश मिलते ही चंद घंटों में ईरान पर हमला कर सकता है अमेरिका; निशाने पर परमाणु ठिकानें

US Iran Tension: अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। ईरान के परमाणु ठिकानों को घेरने और रिवोल्यूशनरी गार्ड पर प्रतिबंधों के बाद अब युद्ध का खतरा गहरा गया है।
US Iran war news:  मिडिल ईस्ट में हाई अलर्ट, आदेश मिलते ही चंद घंटों में ईरान पर हमला कर सकता है अमेरिका; निशाने पर परमाणु ठिकानें
अमेरिका ईरान युद्ध, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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US Iran War News In Hindi: मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है क्योंकि अमेरिका ने अरब सागर से लेकर लाल सागर तक ईरान के खिलाफ अपना शिकंजा कस दिया है। अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करते हुए इस क्षेत्र में दो प्रमुख विमानवाहक पोत, यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट, तैनात किए हैं। इसके साथ ही कई मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत भी तैनात किए गए हैं, जो किसी भी समय कार्रवाई के लिए तैयार हैं।

निशाने पर ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकाने

अमेरिकी रणनीति अब केवल रक्षात्मक नहीं रही है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका अब ईरान के इसफाहान, नांतेज और फोर्दो जैसे महत्वपूर्ण परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों और कमांड सेंटरों पर समुद्र और आसमान दोनों तरफ से हमले करने की स्थिति में आ गया है। सैन्य विशेषज्ञों का दावा है कि अमेरिका को अब किसी अतिरिक्त सेना या संसाधनों की आवश्यकता नहीं है यदि राजनीतिक आदेश मिलता है तो कुछ ही घंटों के भीतर सीमित या बड़े पैमाने की सैन्य कार्रवाई शुरू की जा सकती है। कतर, बहरीन, सऊदी अरब, इराक और जॉर्डन के सैन्य अड्डों पर अमेरिकी वायुसेना की सक्रियता पहले ही बढ़ चुकी है। जानकारी के अनुसार इस समय फारस की खाड़ी और लाल सागर में तैनात अमेरिकी युद्धपोत 70 से अधिक लड़ाकू विमान 300 से अधिक टॉमहॉक मिसाइलों से लैस हैं। इसके अलावा, खाड़ी देशों में करीब 50,000 अमेरिकी सैनिक भी तैनात हैं।

ईरान की ताकत और जवाबी चेतावनी

दूसरी ओर, ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह कतर स्थित अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर मिसाइलें और ड्रोन दाग सकता है, जैसा कि उसने जून 2025 में किया था। ईरान की सैन्य शक्ति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, उसके पास करीब 11.8 लाख सैनिक हैं। साथ ही लगभग 1,700 टैंक, 65 हजार बख्तरबंद वाहन, 6,800 से ज्यादा तोपें और करीब 300 लड़ाकू विमान मौजूद हैं।

US-Iran military tensions infographic
अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव को इन्फोग्राफिक की मदद से समझिए

इसके अलावा, ईरान के पास अत्याधुनिक और खतरनाक हथियार भी हैं। उसके शाहिद-136 सुसाइड ड्रोन दुश्मन के ठिकानों पर सीधा हमला करने में सक्षम हैं। वहीं फतह जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें करीब 1400 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं जो पहले भी इजरायल के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। ईरान के शाहिद-129 ड्रोन निगरानी के साथ-साथ मिसाइल हमले करने में सक्षम हैं, जबकि मोहाजेर-6 ड्रोन टोही मिशन के साथ गाइडेड बम और मिसाइलों से सटीक स्ट्राइक कर सकते हैं।

यूरोपीय संघ का बड़ा कदम

जंग की इस आहट के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। यूरोपीय संघ ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है, जिसके बाद इसके शीर्ष कमांडरों और संगठनों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर सुलह की कोशिशें भी जारी हैं।

तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन ने डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच वीडियो वार्ता का प्रस्ताव रखा है, जिस पर चर्चा के लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची अंकारा जा रहे हैं।

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