लाडकी बहिन योजना बंद कर दें..., बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से क्याें कहा ऐसा; जानें पूरा मामला

Ladki Bahin Yojana: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही लाडकी बहिन योजना जैसी योजनाएं बंद करने की नसीहत दे दी। जानिए क्या है पूरा मामला।
Bombay High Court Slams Maharashtra Government Over Ladki Bahin Yojana Funding Issue
कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Bombay High Court On Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र की महायुति सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' अब कानूनी विवादों और अदालती तल्ख टिप्पणियों के घेरे में आ गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार के पास शिक्षकों और कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार बकाया भुगतान करने के लिए धन नहीं है, तो उसे अपनी लोकप्रिय योजनाओं को जारी रखने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब मुंबई नगर निगम (BMC) के शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त एक महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता का आरोप था कि उसे सातवें वेतन आयोग के तहत मिलने वाला पेंशन लाभ और अन्य बकाया राशि अभी तक नहीं दी गई है। सुनवाई के दौरान, बीएमसी के वकील ने तर्क दिया कि उनके पास फंड की कमी है क्योंकि राज्य सरकार से आवश्यक वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं हो रही है।

बॉम्बे हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

बीएमसी और महाराष्ट्र सरकार के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने पूछा कि जब आप लाडकी बहिन योजना के लिए 40,000 करोड़ रुपये खर्च कर सकते हैं, तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हक के पैसे देने के लिए फंड की कमी कैसे हो सकती है? अदालत ने यहां तक कह दिया कि यदि बुनियादी संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए खजाना खाली है, तो सरकार को ऐसी योजनाएं बंद कर देनी चाहिए।

लाडकी बहिन योजना से राजकोष पर भारी बोझ

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव में महायुति की जीत का आधार मानी जाने वाली लाडकी बहिन योजना पर सालाना 43,740 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है। हालांकि, इसकी वजह से राज्य की अन्य विकास परियोजनाओं और सरकारी भुगतानों पर असर पड़ रहा है। हाल ही में महिला एवं बाल विकास विभाग ने ई-केवायसी (e-KYC) प्रक्रिया के माध्यम से बड़ी कार्रवाई की है।

जांच में सामने आया है कि लगभग 71 लाख महिलाएं इस योजना के लिए अपात्र पाई गई हैं। इनमें से कई ने केवाईसी नहीं कराया था, जबकि कुछ संपन्न परिवारों से थीं या नियमों का उल्लंघन कर रही थीं। शुरुआत में 2.43 करोड़ महिलाओं ने लाडकी बहिन योजना के लिए पंजीकरण कराया था, जिन्हें 1,500 रुपए प्रति माह दिए जा रहे थे। अब सरकार वित्तीय संतुलन बनाने के लिए केवल वास्तविक पात्र महिलाओं तक ही लाभ सीमित करने की कोशिश कर रही है।

हाई कोर्ट की यह टिप्पणी सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी है। एक तरफ जहां सरकार 'लाडकी बहिन योजना' के जरिए अपनी लोकप्रियता बरकरार रखना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों के वेतन और पेंशन जैसे बुनियादी मुद्दे अब अदालती कार्यवाही का केंद्र बन गए हैं।

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