एक्सपायरी माल की धड़ल्ले से बिक्री (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Hingoli district: वसमत शहर और तहसील में भले ही घरपहुंच व किराना दुकानों पर खाद्य सामग्री मिल रही है, मगर बारिश के दिनों में नागरिकों का दायित्व है कि वे सोच-समझकर ही इसका सेवन करें क्योंकि इससे उनका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। टोस्ट, खारी, बिस्किट, ब्रेड, केक और पेस्ट्री का समयावधि खत्म हुआ माल अर्थात एक्सपायरी डेट का माल सरेआम बेचा जा रहा है। खुदरा व बड़ी थोक दुकानों पर यह नजारा देखा जा सकता है।
हैरत की बात यह है कि इन चीजों पर जिस अन्न एवं औषधि विभाग का नियंत्रण होना चाहिए, वह आंखें मूंदकर बैठा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहर एवं परिसर में गरीब और अनपढ़ उपभोक्ता रहते हैं। वे इन चीजों से दूर रहते हैं। वे खुदरा व बड़ी थोक दुकानों से खरीदारी करने के बाद इन खाद्य पदार्थों का सेवन कर अपनी और अपने परिवार के सदस्यों की सेहत खराब कर रहे हैं। बताया जा रहा है सरकार व विक्रेताओं की उदासीनता के चलते कई नागरिक खुद ये चीजें खाते ही हैं।
साथ ही मासूम बच्चों व बुर्जुगों को भी जाने-अनजाने में जहरीले बिस्किट और केक खिलाते हैं। इनका सेवन करने के बाद वे बीमार पड़ने की शिकायतें भी आ रही हैं। पैसा करने के बावजूद तहसील के नागरिकों का स्वास्थ्य खतरे में होने के बावजूद तहसील व हिंगोली जिले के अधिकारियों की अनदेखी के चलते नागरिक सवाल पूछ रहे हैं कि, क्या उन्होंने आंखे मूंद ली हैं या आर्थिक हितसंबंधों के चलते जानबूझकर अनजान बन रहे हैं। इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए अन्न एवं औषधि प्रशासन के अधिकारी उपलब्ध नहीं हो सके।
यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सिर्फ एक्सपायरी माल नहीं, बल्कि धीमा जहर है। जो प्रशासनिक उदासीनता के चलते हर रोज जनता के घर पहुंच रहा है। नागरिकों का आरोप साफ है जब छोटे दुकानदार पकड़े जाते हैं, तो कार्रवाई की जाती है, लेकिन असली सप्लायर और कंपनियां बच निकलती हैं। समयावधि खत्म हुआ माल खाने से विषबाधा के साथ ही, उल्टी-दस्त की समस्या के साथ ही पेट व लीवर की बीमारियां भी हो सकती है। यहां तक कि जान लेवा हालात तक बन सकते हैं।
वसमत के नागरिकों ने अन्न एवं औषधि विभाग से एक्सपाइरी माल बेचकर नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले दुकानदारों और सप्लायरों पर एफआईआर दर्ज कर उचित कदम उठाने की मांग की है, ताकि उनकी सेहत अच्छी बनी रहे।
बताया जाता है कि, वसमत शहर और तहसील में दुकानदारों व सप्लायरों को नागरिकों के स्वास्थ्य की बिल्कुल चिंता नहीं है। चाहे ग्राहक की जान जाए या बच्चे बीमार पड़ जाए उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। बस कमाने की चिंता उन्हें लगी रहती है। एक्सपायरी का सामान सस्ते में लेकर अधिक दाम में बेचना इनका धंधा है। ऐसे में नागरिक कंगाल व विक्रेता मालामाल हो रहे हैं।