Gondia News: तिरोड़ा नगर परिषद में नई प्रभाग रचना पर बवाल, SC प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल

Gondia News In Hindi: तिरोड़ा नगर परिषद की नई प्रभाग रचना पर अनुसूचित जाति के नागरिकों ने प्रतिनिधित्व और विकास निधि में अनदेखी का आरोप लगाते हुए आपत्ति दर्ज की, और नई रचना पर पुनर्विचार की मांग की।
Tiroda Municipal Council
तिरोडा नगर परिषद (फोटो नवभारत)
Published on
Updated on

Tiroda Municipal Council Election: गोंदिया जिले के तिरोड़ा नगर परिषद सदस्य पद के लिए शहर में 10 प्रभाग है वहीं 20 पार्षद रहेंगे। इसके पहले 17 पार्षदों की संख्या थी और 8 प्रभाग थे। अब नई सुधारीत प्रभाग रचना से 10 प्रभाग बनाए गए जिसके 20 पार्षद व स्विकृत पार्षद 3 ऐसे कुल पार्षदों की संख्या 23 होंगी।

पिछले 8 वर्ष के चुनाव में पार्षदों की तुलना में नई प्रभाग रचना से 4 पार्षदों की बढ़ोत्तरी होगी। फिलहाल प्रभाग बढ़ने से पुरानी प्रणाली में तोड़फोड़ होना लाजमी तो है लेकिन जातिगत आरक्षित जनसंख्या, वहां के निवासियों की संख्या, आरक्षित वार्डों के विकास के लिए मिलने वाली 5 प्रतिशत बजट की तुलना में मिलती लेकिन इन वार्डों के आरक्षित वार्डों के निवासियों की जातिगत को तोड़फोड़ कर प्रभाग रचना की गई। जिससे वार्ड की जनता चुनाव लड़कर विजयी होने में वार्डों का विकास करने से काफी दूर हो जाएगी।

कितनी है तिरोड़ा नगर परिषद की जनसंख्या?

फिलहाल शहर क वर्ग में है, यहां की जनसंख्या 25,183 है। इसमें लोधीटोला, बेलाटी खुर्द गांव मिलाकर सन 1956 में इस नगर परिषद की स्थापना हुई। तिरोड़ा शहर में निवासियों को नप प्रशासन से वार्ड व प्रभाग के रास्ते, नाली, पानी, बिजली, शौचालय, घरकुल आदि सुविधा का निराकरण करने के लिए शिकायत करनी पड़ती है। इसका ध्यान रखते हुए समस्या का हल निकालने के लिए प्रतिनिधित्व करने वालों का ध्यान रखते हुए प्रभाग रचना आवश्यक है। शहर के कब्रस्थान के पास की सीजे पटेल कॉलेज सामने की नई वसाहत झोपड़पट‍्टी के मकान अतिक्रमण में (सरकारी जगह) होने से यहां की समस्या व घरकुल योजना की सुविधा में नप से चर्चा होते रहने से इनका प्रतिनिधित्व करने के लिए दोनों परिसर एक ही प्रभाग में रहना जरुरी है।

5 प्रतिशत निधि पर संकट

इसी तरह मागासवर्गियों का प्रतिनिधित्व करते समय अनुसूचित जातियों की संख्या भी प्रभाग में व अन्य सामान्य खुला प्रवर्ग से ज्यादा संख्या में होनी चाहिए। इसका विचार कर इस बिंदू पर नजर रखकर प्रभाग रचना करना जरुरी थी। लेकिन अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व करते वक्त बहुसंख्य में सामान्य ओपन व अन्य वर्ग के नागरिकों को अधिक संख्या में शामिल कर प्रभाग रचना की है।

इस प्रभाग रचना से अनुसूचित जाति के उम्मीदवार को प्रतिनिधित्व कर अलग से सरकारी 5 प्रतिशत निधि लाने में भारी कठिनाईयां होगी क्योंकि यह जातिगत आधार पर मिलती है। यह निधि प्राप्त नहीं होने से प्रभाग के नागरिकों का विकास नहीं होगा। वहां की समस्याओं का हल नहीं निकलेगा, यह प्रभाग अविकसित है इसलिए यह मुद‍्दा अहम है।

इन बिंदूओं को ध्यान में रखते हुए अनुसूचित जाति का नीमटोली व तक्षशिला बौध्द विहार सामने का परिसर एक ही प्रभाग में रहना चहिए। इस मांग का लिखित निवेदन महात्मा फुले वार्ड परिसर के संजय जांभुलकर, सुरेंद्र भोयर सहित वार्ड वासियों ने नप मुख्याधिकारी को दिया है व प्रकाशित प्रभाग रचना पर आक्षेप लिया है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com