
गोंदिया नगर परिषद (फाइल फोटो)
Gondia News: हाल ही में जिले की चार स्थानीय निकाय के आम चुनाव हुए थे। गोंदिया को छोड़कर, तीन निकाय गोरेगांव, सालेकसा और तिरोड़ा में लोगों ने एक पार्टी को सत्ता का जनादेश दिया था। लेकिन, उपाध्यक्ष पद के लिए जिन पार्टियों को बहुमत मिला था, उनके पार्षदों के बीच काफी खींचतान शुरू हो गई है। एक से ज्यादा नाम सामने आने से उन पार्टियों के बड़े नेताओं को काफी परेशानी हो रही है।
उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले भी गटनेता चुनने की प्रक्रिया में पार्टी के बड़े नेताओं को काफी परेशानी उठानी पड़ी थी। उल्लेखनीय है कि तिरोड़ा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को गटनेता चुनने के लिए मतदान करना पड़ा। इसलिए, गटनेता तो पक्का हो गया है, लेकिन उपाध्यक्ष कौन होगा? यह सवाल बना हुआ है।
गोंदिया, गोरेगांव, सालेकसा और तिरोड़ा चारों स्थानीय निकाय के आम चुनाव हो चुके हैं। नतीजों के बाद सत्ता का जनादेश भी सामने आ गया है। गोंदिया को छोड़कर बाकी तीनों नगर निकायों की जनता ने एक पार्टी को सत्ता के लिए जनादेश दिया है। इसलिए गोंदिया जिले में राजनीतिक दलों को सत्ता के लिए समझौता करने पर मजबूर होना पड़ा।
इसलिए गोंदिया नगर परिषद में उपाध्यक्ष का पद किसे मिलेगा? यह राजनीतिक दलों के नेताओं की बातचीत के बाद ही साफ होगा। हालांकि, तीनों नगर निकायों में साफ बहुमत होने के बावजूद उन दलों के नेताओं को उपाध्यक्ष के लिए किसी एक नाम पर मुहर लगाना मुश्किल हो रहा है। गटनेता के पहले ही उपाध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की भीड़ बढ़ती जा रही है। नेताओं को उनके सामने खड़ा किया जा रहा है।
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दूसरी ओर, पार्षदों के वोट पाने की चाहत रखने वाले पार्टी के अंदर ही मोर्चे बना रहे हैं। इस बीच, पार्टी के बड़े नेताओं को गटनेता चुनने के लिए पार्टी के अंदर गुटबाजी का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए गटनेता तो बन गया है, लेकिन उपाध्यक्ष का पद किसे मिलेगा?
यह चारों नगर निकायों में निश्चित रूप से मुश्किल हो गया है। उपाध्यक्ष के लिए पार्षदों की सभा कब बुलाई जाएगी? इस ओर ध्यान लगा हुआ है। इस निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दोनों के नेताओं के लिए अपने चहेतों को उपाध्यक्ष पद के लिए चुनना बहुत मुश्किल होगा।






