
Public Health Risk :ब्रह्मपुरी नगर परिषद क्षेत्र (सोर्सः सोशल मीडिया)
Brahmapuri Sanitation Issue: ब्रह्मपुरी नगर परिषद के अंतर्गत नाली और सीवर सफाई के लिए कार्यरत कर्मचारियों की संख्या वर्ष 2022–23 से काफी कम कर दी गई है, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। इसका सीधा असर नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसी पृष्ठभूमि में राहुल भोयर, आशीष गोंडाने और रवि पवार ने नगर परिषद के मुख्याधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सफाई कर्मचारियों की संख्या तुरंत बढ़ाने और शहर की साफ-सफाई व्यवस्था सुचारु करने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया है कि पिछले लगभग 20 वर्षों से, यानी वर्ष 2022 तक, संविदा प्रक्रिया के माध्यम से हर साल करीब 50 कर्मचारी नाली और सीवर सफाई का कार्य कर रहे थे। लेकिन 2022–23 से यह संख्या घटाकर मात्र 35 कर दी गई, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वर्तमान में ब्रह्मपुरी की अधिकांश नालियां, सीवर लाइनें और सीवेज चैनल कचरे से भरे हुए हैं और उनमें से दुर्गंध फैल रही है।
इस स्थिति के कारण घरेलू सीवेज के बहाव में रुकावट आ रही है। साथ ही मानसून के दौरान जलभराव, मच्छरों और मक्खियों के प्रकोप में वृद्धि हो रही है, जिससे डेंगू, मलेरिया और गैस्ट्रो जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि ब्रह्मपुरी शहर का तेजी से विस्तार हो रहा है, आबादी, कॉलोनियां और व्यावसायिक परिसर बढ़ रहे हैं, ऐसे में सफाई कर्मचारियों की संख्या घटाना गंभीर विरोधाभास है। नागरिकों का कहना है कि वर्तमान में शहर को कम से कम 110 से अधिक सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है।
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साथ ही शहर को जोनवार विभाजित कर प्रत्येक जोन में पूरे वर्ष कम से कम 5 कर्मचारियों की नियुक्ति अनिवार्य है। महाराष्ट्र नगर परिषद अधिनियम, 1965 और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना नगर परिषद का कर्तव्य है। जब नागरिक नियमित रूप से कर, पानी शुल्क और अन्य देयकों का भुगतान करते हैं, तब बुनियादी सेवाओं में कुप्रबंधन गंभीर विषय है।






