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179 बांधों की गाद बनी बड़ी चुनौती, कोल्हापुरी बांधों की भंडारण क्षमता घटी, मरम्मत के लिए निधि की प्रतीक्षा
Bhandara Kolhapuri Dams: भंडारा जिले के 179 कोल्हापुरी बांध गाद भरने और रखरखाव के अभाव में संकट में हैं, जिससे सिंचाई क्षमता घट गई है और मरम्मत के लिए पर्याप्त निधि की जरूरत है।
- Written By: आंचल लोखंडे

Bhandara Kolhapuri Dams:भंडारा जिले के 179 कोल्हापुरी बांध (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara News: भंडारा जिले की सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कोल्हापुरी पद्धति के बांध आज अस्तित्व के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। वैनगंगा, बावनथडी और चूलबंद जैसी प्रमुख नदियों पर बने ये बांध लंबे समय से रखरखाव के अभाव में गाद से भर गए हैं, जिससे उनकी जल भंडारण क्षमता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जिला परिषद प्रशासन के अंतर्गत जिले में कुल 179 कोल्हापुरी बांध कार्यरत हैं, जिनका निर्माण वर्ष 1988 से 2010 के बीच किया गया था।
इन बांधों के माध्यम से जिले की 7,021 हेक्टेयर कृषि भूमि को प्रत्यक्ष सिंचाई का लाभ मिलता है। हालांकि, वर्तमान स्थिति को देखते हुए रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए पानी की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इन लघु और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की मूल भंडारण क्षमता 24.83 दलघमी थी। बांधों के निर्माण और अब तक की मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
दरारें, जंग लगे गेट और चोरी की घटनाएं
मोहाडी और तुमसर तहसीलों में कई बांधों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं, जबकि लोहे के गेट जंग लगने के कारण अनुपयोगी हो गए हैं। कई स्थानों पर बांधों के गेट चोरी होने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे मानसून के बाद पानी रोकना मुश्किल हो गया है। नियमित सफाई और गाद निकासी न होने के कारण बांधों के तल में भारी मात्रा में गाद जमा हो गई है, जिससे उनकी मूल उपयोगिता लगातार समाप्त होती जा रही है।
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ऊपर बनी सड़कें जर्जर, सुरक्षा दीवारें टूटीं
कोल्हापुरी बांध न केवल सिंचाई के स्रोत हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्ग के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई गांवों को जोड़ने वाले इन बांधों के ऊपर बनी सड़कें उखड़ चुकी हैं और सुरक्षा दीवारें टूट गई हैं। इसके कारण इन मार्गों से आवागमन करना जानलेवा साबित हो रहा है।
7,021 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ
स्थानीय किसानों ने सरकार से मांग की है कि बांधों की ऊंचाई बढ़ाई जाए और गाद निकासी का कार्य युद्ध स्तर पर किया जाए। किसानों का कहना है कि समय रहते यदि इन बांधों का पुनरुद्धार नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।
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प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
इन परियोजनाओं के संरक्षण और पुनर्जीवन में सबसे बड़ी बाधा स्वतंत्र और पर्याप्त निधि का अभाव है। वर्तमान में जिला वार्षिक योजना के सीमित फंड से ही मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं, जो नाकाफी साबित हो रहे हैं। कई बांधों के नवीनीकरण प्रस्ताव लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन भारी निवेश की आवश्यकता के कारण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
24.83 दलघमी कुल भंडारण क्षमता
विशेषज्ञों का मानना है कि इस महत्वपूर्ण जल विरासत को बचाने के लिए आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों, वैज्ञानिक गाद प्रबंधन और जनभागीदारी को अपनाना अनिवार्य है। प्रशासन के लिए इन सभी 179 कोल्हापुरी बांधों को पुनर्जीवित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है, ताकि जिले के सिंचाई क्षेत्र को सुरक्षित रखा जा सके।
Bhandara kolhapuri dams siltation irrigation crisis
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