

BJP vs Congress on Khamenei Death: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय हलचल अब महाराष्ट्र की राजनीति में एक कड़े जुबानी जंग में तब्दील हो गई है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी द्वारा केंद्र सरकार के स्टैंड पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए राज्य के कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन ने तीखा पलटवार किया है। महाजन ने कांग्रेस पर वैश्विक मुद्दों का राजनीतिकरण करने और देश की शांति में खलल डालने की कोशिश का आरोप लगाया है।
नासिक में मीडिया से बात करते हुए महाजन ने स्पष्ट किया कि भारत को दूसरे देशों के आंतरिक या संवेदनशील मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है।
सोनिया गांधी की आलोचना का जवाब देते हुए गिरीश महाजन ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को यह समझने की जरूरत है कि भारत के अपने हित सर्वोपरि हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "सोनिया गांधी को समझना चाहिए कि हमें हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए? हमारे देश में सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और हम यहां सुकून से रह रहे हैं। ऐसे में इस तरह के बयान देकर आप क्या साबित करना चाहती हैं?" महाजन का इशारा स्पष्ट था कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चल रहा है और किसी विदेशी नेता के मुद्दे पर देश की आंतरिक शांति को दांव पर नहीं लगाया जा सकता।
इससे पहले, सोनिया गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि एक पारंपरिक मित्र देश (ईरान) के सर्वोच्च नेता के निधन पर भारत का रुख इतना अस्पष्ट क्यों है? कांग्रेस का तर्क है कि भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए सरकार को अधिक सक्रियता दिखानी चाहिए थी। इसी "चुप्पी" को कांग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक विफलता के रूप में पेश करने की कोशिश की है, जिस पर अब भाजपा के मंत्रियों ने आक्रामक रुख अपना लिया है।
गिरीश महाजन का बयान भाजपा की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें वे अंतरराष्ट्रीय विवादों को घरेलू राजनीति से दूर रखना चाहते हैं। महाजन ने कांग्रेस को नसीहत दी कि वैश्विक संकटों के समय बयानबाजी करने के बजाय देश की स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए। खामेनेई की मौत के बाद मुंबई और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच महाजन की यह टिप्पणी कूटनीतिक और राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।