तबादले के बाद भी 120 शिक्षक बिना पोस्टिंग, पदस्थापना की मांग को लेकर शिक्षकों का जिप CEO को ज्ञापन

Teacher Issues: संभाजीनगर जिला परिषद में तबादले के बाद आए 120 शिक्षक अब तक पदस्थापना के इंतजार में हैं। रिक्त पद न होने से शिक्षक बिना कार्य बैठे हैं, आदर्श शिक्षक समिति ने सीईओ को ज्ञापन सौंपा।
Even after the transfers, 120 teachers remain without postings; teachers submit memorandum to Zilla Parishad CEO demanding appointments
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar Education: छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद में तबादले के बाद आए कुल 120 अध्यापक अब तक पदस्थापना के इंतजार में हैं, इनमें 98 अध्यापक जिले के भीतर स्थानांतरण से व 22 शिक्षक अन्य जिलों से तबादले के जरिए यहां पहुंचे हैं।

हकीकत यह है कि जिले के स्कूलों में रिक्त पद उपलब्ध न होने के चलते इन सभी अध्यापकों को अभी तक किसी भी शाला में पोस्टिंग नहीं दिए जाने से वे बिना कार्य के बैठने को मजबूर हैं। इस मुद्दे को लेकर आदर्श शिक्षक समिति ने जिप के सीईओ अंकित को ज्ञापन सौंपकर कहा कि प्रधानाध्यापक, स्नातक शिक्षक के रिक्त पदों व संभावित सेवानिवृत्ति से ये पद रिक्त होंगे।

इसे देखते हुए स्थानों पर शिक्षकों की तत्काल पदस्थापना की जाए। समिति ने अन्य अहम मुद्दों पर भी जिला परिषद प्रशासन का ध्यानाकर्षित किया है। दिलीप ढाकणे, अंजुम पठान, संतोष बरबंडे, राजेंद्र नवले, बाजीराव ताठे, बाबूलाल राठौड़, दीपा देशपांडे, बबीता नरवटे, पद्मा वायकोस ने ज्ञापन सौंपकर मांगें रखीं।

इसमें विस्तार अधिकारी, केंद्र प्रमुख, प्रधानाध्यापक की पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने, टीईटी संबंधी निर्णयों के अधीन रहते हुए लंबित प्रक्रियाएं पूरी करने, 24 वर्ष सेवा पूर्ण करने वाले को चयन श्रेणी लाभ व 12 वर्ष सेवा पूर्ण करने वाले को चटोपाध्याय लाभ प्रदान करने।

लंबित मामलों के निपटारे के लिए पेंशन अदालत आयोजित करने, वर्षों से लंबित फाइलों के लिए लोकसेवा अधिनियम के अंतर्गत जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने, बढ़ते अनावश्यक डाक व प्रशासनिक कार्यों में कटौती करने का आग्रह किया गया।

जिप चुनाव के लिए दें नई जानकारी

समिति ने आरोप लगाया कि पंचायत समिति या जिला परिषद स्तर पर कुछ चुनिंदा शिक्षक पिछले कई वर्षों से प्रशासनिक कार्यों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप कर रहे हैं। विभागीय लिपिकों के कुछ शिक्षकों को विशेष रूप से काम में लगाने से अनियमितताएं बढ़ने के साथ ही गोपनीय जानकारी बाहर जा रही है। इस पर संबंधित विभाग प्रमुखों को निर्देश देने की मांग की गई।

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