
public interest litigation water project (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar: छत्रपति संभाजीनगर शहर की नई जलापूर्ति योजना से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने कार्य में आ रही विभिन्न बाधाओं पर कड़ी नाराजगी जताई। योजना पर कार्यरत ठेकेदार कंपनी जेवीपीआर ने अदालत को बताया कि 27 जलकुंभों का कार्य पूर्ण हो चुका है और उन्हें शीघ्र ही नगर निगम (मनपा) को हस्तांतरित किया जाएगा।
बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री ने मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को तय की। सुनवाई के दौरान मनपा की ओर से अधिवक्ता संभाजी तोपे ने एन-3 और एन-4 क्षेत्रों में आंतरिक जलापूर्ति पाइपलाइन डालने के लिए खोदे गए गड्ढों को अब तक नहीं भरने की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया। इस पर खंडपीठ ने संबंधित विभाग को तत्काल गड्ढे भरने के निर्देश दिए।
मनपा ने यह भी बताया कि बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद अब तक केवल पांच जलकुंभ ही नगर निगम को सौंपे गए हैं। इस पर ठेकेदार कंपनी की ओर से अदालत में कहा गया कि सभी 27 जलकुंभ तैयार हैं, उनकी परीक्षण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और हस्तांतरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएगी। इसके अलावा योजना की प्रगति दर्शाने वाले फोटोग्राफ भी अदालत में प्रस्तुत किए गए।
मनपा की ओर से बताया गया कि ठेकेदार कंपनी को अब तक 22.53 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। ठेकेदार ने दावा किया कि लगभग 200 करोड़ रुपये के बिल अभी भी बकाया हैं, जिसके कारण कार्य में गंभीर अड़चनें आ रही हैं। सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की ओर से यह जानकारी दी गई कि मनपा से 111.46 करोड़ रुपये की मांग की गई है। हालांकि, मनपा ने स्पष्ट किया कि आवश्यक वाउचर प्राप्त न होने के कारण भुगतान को स्वीकृति नहीं दी गई है।
सुनवाई में यह भी बताया गया कि हिना नगर क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता शेलके ने पिछले आठ महीनों से योजना का कार्य रोका हुआ है और इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। इस पर खंडपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सरकारी वकील गिरासे को लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए।
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सुनवाई में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता देशमुख, एनएचएआई की ओर से संजीव, ठेकेदार कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एन. धोर्डे, न्यायालय मित्र के रूप में अधिवक्ता शंभूराजे देशमुख और मूल याचिकाकर्ता अधिवक्ता अमित मुखेड़कर उपस्थित रहे।
खंडपीठ ने इस पूरे मामले को लेकर असंतोष जताते हुए महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के सदस्य सचिव को 12 फरवरी तक लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक ठेकेदार कंपनी से प्राप्त बिलों की जांच कर यह विवरण देने को कहा गया कि कितना भुगतान किया गया है और कितनी राशि शेष है, इसका विस्तृत हलफनामा भी अदालत में दाखिल करने के आदेश दिए गए।






