

Amravati News: वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय नेता बालासाहेब आंबेडकर ने शासकीय विश्रामगृह में आयोजित पत्रकार परिषद में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और हाल के समझौतों के कारण सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और इन मुद्दों पर देश को स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।
आंबेडकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति और आर्थिक फैसलों में बाहरी दबाव की आशंका दिखाई देती है। उनका आरोप है कि पहले भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण इस नीति में बदलाव करना पड़ा, और बाद में परिस्थितियों के चलते फिर से तेल खरीद शुरू की गई।
उन्होंने मध्य-पूर्व की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे पर ईरान भारत के साथ खड़ा रहा, लेकिन बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात में भारत ने खुलकर उसका समर्थन नहीं किया। इससे यह सवाल उठता है कि भारत की विदेश नीति किस दिशा में आगे बढ़ रही है। कृषि क्षेत्र को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई।
आंबेडकर ने आरोप लगाया कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में कम शुल्क के साथ प्रवेश दिया जा रहा है, जबकि भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाया जाता है। उनका कहना है कि यदि सस्ती विदेशी कपास भारत में आने लगी, तो इससे देश के कपास उत्पादक किसानों और भारतीय कपास निगम को नुकसान हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले विदेशी बैंकों को भारत में कारोबार करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति आवश्यक होती थी, लेकिन अब उन्हें अधिक छूट दी जा रही है। इससे देश की आर्थिक नीतियों और नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
आंदोलन की घोषणा करते हुए आंबेडकर ने बताया कि 23 मार्च को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय पर मोर्चा और धरना आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन में करीब 18 सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने नागरिकों से बड़ी संख्या में इसमें भाग लेने की अपील की। पत्रकार परिषद में भारतीय बौद्ध महासभा के राज्य संयोजक विजयकुमार चौरपगार, जिला अध्यक्ष राहुल मेश्राम और संजय चौरपगार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।