राज्य का पहला ऑटिज्म फ्रेंडली स्कूल संभाजीनगर में शुरू, संवेदनशीलता ही सेवा की आत्मा: गिरीश कुलकर्णी

Sambhajinagar Autism Friendly School: संभाजीनगर के वालूज क्षेत्र में आरंभ संस्था के ऑटिज्म फ्रेंडली स्कूल का उद्घाटन। यहां विशेष बच्चों को उपचार, शिक्षा व व्यावसायिक प्रशिक्षण एक ही छत के नीचे मिलेगा।
The state's first autism-friendly school opens in Sambhaji Nagar; sensitivity is the soul of service: Girish Kulkarni
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar Special Education Center: छत्रपति संभाजीनगर अहिल्या नगर स्थित स्नेहालय के संस्थापक गिरीश कुलकर्णी ने कहा कि केवल संसाधन जुटाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसके पीछे संवेदनशीलता व भावनाएं होना आवश्यक है, यही आरंभ के कार्य की विशेषताएं हैं। उन्होंने का नई इमारत से ऑटिज्म से संबंधित कार्यों को नई गति मिलने के साथ ही एक उत्कृष्ट रोल मॉडल बनने में मदद मिलेगी।

ऑटिज्म (स्वमग्न) एवं शारीरिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए कार्यरत आरंभस्वयंसेवी संस्था निर्मित स्कूल की नवनिर्मित इमारत का उद्घाटन संपन्न हुआ। ऑटिज्म फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर से लैस यह स्कूल राज्य का पहला ऐसा आधुनिक शिक्षा केंद्र है, जहां विशेष बच्चों को एक ही छत के नीचे उपचार, विशेष शिक्षा व व्यावसायिक प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

वालूज क्षेत्र के हनुमंतगांव में संस्था की विस्तृत भूमि पर निर्मित शाला का उद्घाटन कुलकर्णी व पूर्व आयुक्त जीवन सोनवणे ने किया। किशोर देशपांडे (सावली, कोल्हापुर), डॉ. एनएम जैन (स्व। रतीबाई मगनलाल जैन ट्रस्ट), केदार देशपांडे (उमा सन्स ऑटो कॉम्पो प्रालि), प्रमोद गायकवाड़ (सोशल नेटवर्किंग फोरम, नाशिक), सामाजिक व औद्योगिक क्षेत्र के वरिष्ठ व्यक्तित्व सीपी त्रिपाठी, एफडीसीआई की सीएस व लीगल हेड वर्षाराणी कात्रे, ट्रस्टी चेतन पाटील, वैशाली सुतावणे कुलकर्णी, मिलिंद दामोदरे, संस्था के पालक व राज्य भर से सामाजिक, औद्योगिक व शिक्षा क्षेत्र के लोग मौजूद रहे।

तीन वर्ष में विद्यार्थियों के लिए छात्रावास

परिचय करते हुए संस्था की संस्थापक व निदेशक अंबिका टाकलकर ने कहा कि अपने ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चे को जो सुविधाएं वे उपलब्ध करा सकी, वही सुविधाएं समाज के अंतिम पंक्ति के हर विशेष बच्चे तक पहुंचाने के उद्देश्य से आरंभ की स्थापना की गई है।

आज इस स्कूल के रूप में वह राधना साकार हुआ है व बच्चे शिक्षा व उपचार का लाभ ले सकेंगे, संस्था के अध्यक्ष बालासाहेब टाकलकर ने आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि अगले तीन वर्षों में 100 ऑटिज्म पीड़ित बच्चों के लिए छात्रावास स्थापित करने की कोशिश की जाएगी, कार्यक्रम की शुरुआत आरंभ के छात्रों ने प्रार्थना से की।

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