उद्योग-आईटीआई साझेदारी से बनेंगे कुशल युवा, सीएसआर से कौशल विकास को नई दिशा

Skill Development India: उद्योगों की भागीदारी से आईटीआई में आधुनिक लैब व बुनियादी सुविधाएं विकसित होंगी। सीएसआर के जरिए कौशल, नवाचार व रोजगार के लिए साझा मॉडल पर सहमति बनी।
Industry-ITI partnerships will create skilled youth; CSR will give a new direction to skill development.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
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Corporate Social Responsibility: छत्रपति संभाजीनगर व्यावसायिक शिक्षण व प्रशिक्षण संचालनालय के संयुक्त संचालक प्रदीप दुर्गे ने उद्योग व औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में सहयोग की जरूरत रेखांकित करते हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में उद्योगों को भाग लेने की अपील की। उनका कहना था कि इससे संस्थाओं के क्षेत्र में उद्योगों के सहयोग से बुनियादी सुविधाएं व लैब विकसित करने पर उद्योगों की जरूरत के अनुसार स्तरीय विद्यार्थी बनाने में मदद मिलेगी, जिनका विनियोग आगे कुशल मानव संसाधन के रूप में हो सकेगा।

सामाजिक उत्तरदायित्व अर्थात सीएसआर सिर्फ निधि तक सीमित नहीं है, बल्कि नवकल्पना, कौशल विकास व समाजाभिमुख परिवर्तन के लिए प्रभावी माध्यम साबित होगा।

उद्योग, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) और स्टार्टअप्स के बीच प्रभावी व दीर्घकालिक सहयोग स्थापित कर नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मराठवाड़ा एक्सेलेरेटर फॉर ग्रोथ एंड इनक्यूबेशन काउंसिल (MAGIC), व्यावसायिक शिक्षा व प्रशिक्षण संचालनालय (DVET), मराठवाड़ा ऑटो क्लस्टर (MAC) की ओर से सीएसआर मिक्सर कार्यक्रम में वे बोल रहे थे।

इस सत्र में उद्योगों के सामाजिक उत्तरदायित्व के जरिए नवउद्यमियों को समर्थन, कौशल विकास, अनुसंधान व प्रशिक्षण के लिए संयुक्त उपक्रम लागू करने को लेकर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।

मराठवाड़ा ऑटो क्लस्टर के अध्यक्ष मिलिंद केक, सीआईआई मराठवाड़ा विभाग के अध्यक्ष प्रशांत नरवड़े, सामाजिक उत्तरदायित्व व आर्थिक सलाहकार सीए मंदार जोशी, एंड्युरन्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के अध्यक्ष संजय संगई, मराठवाड़ा अॅक्सेलरेटर फॉर ग्रोध एंड इन्क्यूबेशन काउंसिल के संचालक आशीष गर्दै प्रमुखता से उपस्थित थे।

प्रशिक्षण संस्थाओं को उद्यमी करें सहयोग

दुर्गे ने प्रधानमंत्री सेतू नीति व केंद्र-राज्य-सामाजिक उत्तरदायित्व आधारित निधि मॉडेल की जानकारी दी। उनका मत था कि मॉडेल के अनुसार प्रशिक्षण व कौशल विकास के लिए 50 फीसदी निधि केंद्र सरकार से, 33 फीसदी निधि राज्य सरकार से व शेष 17 फीसदी निधि उद्योगी के सामाजिक उत्तरदायित्व से उपलब्ध कराने के बाद बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा सकती है।

देवर ऑफ मराठवाडा इंडस्ट्रीज पड एग्रीकल्चर के मानद सचिव मिहिर सीदलगेकर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नवीनतम प्रयोग करने वाली नामी कंपनियों के उपक्रम के बारे में जानकारी दी।

प्रशांत नरवडे ने ग्रीयस कंपनी के जरिए कार्यान्वित सीएसआर प्रकल्प से अवगत कराया। मराठवाडा अॅक्सेलरेटर फॉर ग्रोथ एंड इन्वयूबेशन काउंसिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मकरंद कुलकर्णी ने माना।

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