लाडली बहन की ई-केवायसी ने बढ़ाई हलचल, पातुर तहसील के सेतू केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें

Ladli Bahan Yojana: मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना की ई-केवायसी प्रक्रिया में पातुर तहसील में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है, तकनीकी दिक्कतों से प्रक्रिया धीमी चल रही है।
लाडली बहन की ई-केवायसी ने बढ़ाई हलचल
लाडली बहन की ई-केवायसी ने बढ़ाई हलचल (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Akola News: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना’ की ई-केवायसी प्रक्रिया को लेकर तहसील में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। दिवाली के बाद से सेतू केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें लग रही हैं। सुबह से ही केंद्रों पर रौनक दिखाई दे रही है, लेकिन कई स्थानों पर प्रतीक्षा समय तीन से चार घंटे तक पहुंच गया है।कंप्यूटर संबंधी तकनीकी समस्याओं के कारण कार्य की गति धीमी है, जिससे महिलाएं परेशान हैं।

“ई-केवायसी न करने पर भी पैसे मिलेंगे” ऐसी अफवाहों के चलते भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कुछ महिलाओं को योजना की राशि प्राप्त हुई है, जबकि कुछ को नहीं, जिससे असमंजस का माहौल बना हुआ है। आधार लिंकिंग, ओटीपी त्रुटि, उम्र अथवा पारिवारिक जानकारी में विसंगति जैसी तकनीकी दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और ई-केवायसी केवल अधिकृत पोर्टल या सेतू केंद्रों पर ही करें।

ई-केवायसी प्रक्रिया अनिवार्य

प्रशासन के अनुसार, योजना के तहत ई-केवायसी प्रक्रिया अनिवार्य है, इसलिए नागरिक जल्दबाजी न करें और सभी विवरण सही तरीके से दर्ज करें। अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण नागरिकों ने सेतू केंद्रों पर सुविधाएं बढ़ाने की मांग की है।

घर बैठे की भी सुविधा उपलब्ध

सरकार ने ई-केवायसी के लिए अधिकृत पोर्टल शुरू किया है। महिलाएं अपने मोबाइल पर पोर्टल खोलकर स्वयं का और अपने पति या पिता का आधार क्रमांक दर्ज कर घर बैठे ई-केवायसी प्रक्रिया पूरी कर सकती हैं।

अंतिम तिथि 18 नवंबर तक

पहले ई-केवायसी की अंतिम तिथि 30 नवंबर निर्धारित की गई थी, लेकिन महिला एवं बाल कल्याण मंत्री द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के बाद इसे घटाकर 18 नवंबर कर दिया गया है। इसी कारण दिवाली के बाद से सेतू केंद्रों पर फिर से भीड़ बढ़ गई है।

विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के लिए चुनौती

ई-केवायसी के लिए पति या पिता का आधार क्रमांक अनिवार्य होने से विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। मृत पति के आधार से मोबाइल नंबर लिंक न होने पर प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। इस वर्ग के लिए सरकार ने अभी तक कोई विशेष दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं, जिससे इन महिलाओं में असंतोष और चिंता का माहौल है।

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