
Parner Protest:पारनेर में अवैध रेत खनन (सोर्सः सोशल मीडिया)
Illegal Sand Mining Maharashtra: पारनेर तालुका के बोकनवाड़ी में सड़क हादसे में एक युवक की मौत से नाराज़ ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आक्रामक रुख अपनाते हुए मंगलवार सुबह नगर-कल्याण हाईवे पर करीब तीन घंटे तक चक्काजाम किया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो रेत से भरे डंपरों को आग के हवाले कर दिया जाएगा।
मंगलवार सुबह करीब 10 बजे टाकली धोकेश्वर के वासुंदे चौक पर यह आंदोलन शुरू हुआ। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व शिवसेना नेता और जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सुजीत झवारे पाटिल ने किया। नगर-कल्याण राजमार्ग पर तीन घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा।
प्रदर्शनकारियों ने सीधे तौर पर पारनेर तहसीलदार को निलंबित करने की मांग करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। इस मौके पर वरिष्ठ नेता करभरी आहेर, शिवसेना नेता संदीप कपाले, व्यवसायी संदीप रोहकाले, उपसरपंच मौली वरखड़े, सरपंच विमल झवारे, प्रकाश गजरे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और पदाधिकारी मौजूद थे।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पारनेर तालुका के मंडोहाल क्षेत्र में लंबे समय से चल रहा गैर-कानूनी रेत खनन और डंपरों की बेलगाम आवाजाही एक बार फिर एक निर्दोष युवक की जान ले गई। रविवार सुबह करीब 7 बजे मंडोहाल नदी से अवैध रूप से रेत ले जा रहे एक तेज़ रफ्तार डंपर ने बोकनवाड़ी से वासुंदे रोड पर एक दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी।
इस भीषण हादसे में संतोष नन्हे (उम्र 32, निवासी बोकनवाड़ी, तालुका पारनेर) की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि दोपहिया वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
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प्रदर्शन के दौरान पारनेर तहसीलदार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए। वरिष्ठ नागरिकों ने आरोप लगाया कि तहसील कार्यालय में उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल हुआ। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार पर जनता को धमकाने का आरोप लगाते हुए तत्काल निलंबन की मांग की।
चक्काजाम के चलते पारनेर से सकुर जाने वाली मुख्य सड़क पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। कई वाहन लंबी कतारों में फंसे रहे। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपते हुए मांगें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने की अपील की। पुलिस और राजस्व अधिकारियों के आश्वासन के बाद आंदोलन अस्थायी रूप से समाप्त किया गया।






