

Congress Leader on Indore water crisis deaths: मध्यप्रदेश की क्लीन सिटी इंदौर में दूषित पानी से हुई 18 मौतों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस शहर को स्वच्छता में आठ बार नंबर वन का खिताब मिला, वहां आज लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं। खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि इंदौर में मौतें हो रही हैं और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मोहन यादव मस्ती में गाने गा रहे हैं।
पवन खेड़ा ने केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर जल योजना की पोल खोलते हुए कहा कि असलियत में यह हर घर मल योजना बन गई है। उन्होंने दावा किया कि पाइपलाइन बदलने का टेंडर जुलाई 2022 में पास हो गया था, लेकिन कमीशन के चक्कर में काम शुरू नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि लोगों के नलों से मल मिश्रित पानी आया और मासूमों की जान चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरासर प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम है, जिसके चलते आम जनता को अपनी जान गंवानी पड़ी।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि साल 2003 में एशियन डेवलपमेंट बैंक से जो 200 मिलियन डॉलर का लोन मिला था, उसका आखिर क्या हुआ। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या वॉटर सैंपल और पीड़ितों की जांच करवाई गई है। अगर जांच में हैजा के बैक्टीरिया मिले हैं, तो क्या नियमों के तहत केंद्र सरकार और डब्ल्यूएचओ को सूचित किया गया है या आंकड़ों को छिपाया जा रहा है। खेड़ा ने दिल्ली और गुजरात का जिक्र करते हुए कहा कि देश में हवा और पानी के साथ-साथ अब भाजपा नेताओं की जुबान में भी जहर घुल चुका है।
कांग्रेस नेता ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर भी निशाना साधा और कहा कि जब पत्रकार सवाल पूछते हैं, तो वे बदसलूकी और गाली-गलौज पर उतर आते हैं। वहीं महापौर और कलेक्टर के संघ कार्यालय जाने पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोहन भागवत कौन हैं, जो अधिकारियों को तलब कर रहे हैं। खेड़ा ने स्पष्ट कहा कि इस त्रासदी के लिए सिर्फ स्थानीय प्रशासन नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सब जिम्मेदार हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों को दिए जा रहे दो लाख के मुआवजे को नाकाफी बताते हुए कहा कि सरकार अपनी जवाबदेही से भाग रही है।