तमिलनाडु में सीएम की रेस में विजय थलापति, CM स्टालिन का क्या होगा? जानें नए सर्वे में और क्या-क्या

Tamil Nadu Assembly Election 2026 : इस साल होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल काफी गर्म है। डीएमके, एआईएडीएमके और टीवीके के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प नजर आ रहा है।
Vijay Thalapathy is in the running for Chief Minister in Tamil Nadu, What will happen to CM Stalin? Learn more about the new survey
विजय थलापति और एमके स्टालिन। इमेज-एआई
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Tamil Nadu Assembly Election 2026 News : तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले चुनावी रण का तापमान बढ़ गया है। वोट वाइब के हालिया सर्वे के मुताबिक प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर (एंटी इनकंबेंसी) स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। सर्वे में शामिल 58% लोगों का मानना है कि इस बार सरकार बदलने के पूरे आसार हैं। केवल 21% लोग मौजूदा सरकार की वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।

जनता से मुख्यमंत्री के पसंदीदा चेहरे के बारे में पूछा गया तो 33.3% लोगों ने एमके स्टालिन (DMK और सहयोगी दल) पर भरोसा जताया। AIADMK और सहयोगी दल के नेता ई. पलानीस्वामी (EPS) 29.8% के साथ दूसरे स्थान पर हैं। अभिनेता विजय थलापति 23.2% लोकप्रियता के साथ तीसरे नंबर पर काबिज हैं। यह नई पार्टी के लिए काफी प्रभावशाली माना जा रहा है।

किसे मिलेगा कितना वोट?

वोट शेयर की बात करें तो DMK एवं सहयोगी दल और AIADMK के नेतृत्व वाले सहयोगी दल के बीच कांटे का मुकाबला दिख रहा है। DMK एवं इसके सहयोगी दलों को 35.8% और AIADMK एवं सहयोगी दलों को 33.8% वोट मिलने का अनुमान है। इन दोनों के बीच केवल 2 फीसदी का अंतर है। जो चुनाव नतीजों को किसी भी तरफ मोड़ सकता है। वहीं, विजय थलापति की पार्टी टीवीके को 19.2% वोट मिलने की उम्मीद जताई गई है।

विजय थलापति बनेंगे किंगमेकर?

सबसे दिलचस्प सवाल विजय थलापति की भूमिका को लेकर था। सर्वे के चौंकाने वाले नतीजों में 31.4% लोगों का मानना है कि विजय का हाल बिहार के प्रशांत किशोर जैसा होगा, जिनकी पार्टी जन सुराज 2025 के बिहार चुनाव में एक सीट नहीं जीत पाई थी। इसके अतिरिक्त 22.1% लोग उन्हें वोट कटवा मान रहे हैं। महज 7.8% लोगों को लगता है कि वह किंगमेकर की भूमिका निभा पाएंगे।

हर 5 साल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा

तमिलनाडु की परंपरा रही है कि यहां हर 5 साल में सत्ता परिवर्तन होता है, लेकिन कुछ चुनावों ने इस मिथक को तोड़ा भी है। अब देखना होगा कि विजय थलापति का ग्लैमर वोटों में तब्दील होता है या राज्य फिर से अपनी पुरानी द्रविड़ राजनीति के इर्द-गिर्द ही सिमट कर रह जाता है।

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