राहुल-कनिमोझी की मुलाकात के बाद भी फंसा सीटों का पेंच, क्या DMK के साथ 'हैंडशेक' रहेगा बरकरार?

Congress DMK Alliance: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और द्रमुक नेता कनिमोझी ने बुधवार को दिल्ली में बैठक हुई, लेकिन तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर फिलहाल सहमति नहीं बनी है।
Seat issue remains unresolved even after Rahul-Kanimozhi meeting; will the handshake with DMK remain intact?
राहुल गांधी और डीएमके नेता कनिमोझी।
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Congress News: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राज्य की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और डीएमके की वरिष्ठ नेता कनिमोझी के बीच बुधवार को सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर मुलाकात हुई थी। हालांकि, हाई प्रोफाइल मुलाकात के बावजूद सीटों के बंटवारे को लेकर फिलहाल बर्फ पिघलती नजर नहीं आ रही है।

सूत्रों के अनुसार यह बैठक मुख्य रूप से गठबंधन के भीतर की वैचारिक तालमेल और उन मुद्दों पर केंद्रित थी जिन्हें सुलझाया जाना बाकी है। हैरानी की बात यह है कि इस बैठक में कांग्रेस को कितनी सीटें दी जाएंगी, इस पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई। कांग्रेस इस बार तमिलनाडु में बैकफुट पर रहने के मूड में नहीं है। पार्टी की प्रदेश इकाई कम से कम 30 सीटों की मांग कर रही है और साथ ही इस बार सत्ता में सम्मानजनक भागीदारी (कैबिनेट में जगह) की भी उम्मीद लगाए बैठी है।

कांग्रेस का इंतजार और डीएमके की खामोशी

कांग्रेस की बेचैनी अब सार्वजनिक होने लगी है। तमिलनाडु के एआईसीसी प्रभारी गिरीश चोडणकर ने खुलकर कहा कि वे पिछले दो महीनों से DMK के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। उनके बयान से साफ है कि गठबंधन की बातचीत अभी औपचारिक रूप से शुरू भी नहीं हो पाई है।

पिछला प्रदर्शन: 2021 के चुनाव में कांग्रेस 25 सीटों पर लड़ी थी।

मौजूदा स्थिति: स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK पिछली बार के मुकाबले कांग्रेस को अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं दिख रही है।

क्या विजय की TVK बनेगी नया समीकरण?

तमिलनाडु की राजनीति में इस बार एक नया फैक्टर थलापति विजय की पार्टी तमिलागा वेट्री कषगम (TVK) है। कांग्रेस के भीतर एक धड़ा ऐसा भी है जो विजय की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें विकल्प के तौर पर देख रहा है। वैसे, पार्टी का शीर्ष नेतृत्व स्टालिन के साथ पुराने और मजबूत रिश्तों को ही प्राथमिकता देना चाहता है।

राजनीतिक विश्लेषण

तमिलनाडु में अप्रैल-मई में चुनाव संभावित हैं। स्टालिन और राहुल गांधी के बीच निजी संबंध बहुत गहरे हैं, लेकिन जब बात सत्ता और सीटों की आती है तो क्षेत्रीय दल अक्सर कड़ा रुख अपनाते हैं। कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी जमीन भी बचाए रखे और सहयोगी को नाराज भी न करे।

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