- Hindi News »
- India »
- Turkman Gate Timeline Shah Jahan Sanjay Gandhi 1857 Uprising 1976 Emergency And 2026
शाहजहां ने बसाया…संजय ने उजाड़ा, तुर्कमान गेट का ‘खूनी’ इतिहास; जब मलबे के साथ फेंक दी गई थी लाशें
Turkman Gate Full Story: संजय गांधी 1976 में तुर्कमान गेट पहुंचे जिसके बाद वहां बुलडोजर से बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ हुई थी। उस वक्त क्या हुआ था? जानेंगे। लेकिन उससे पहले तुर्कमान गेट को जान लेते हैं।
- Written By: अभिषेक सिंह

कॉन्सेप्ट फोटो (एआई जनरेटेड एंड मोडिफाइड)
Turkman Gate Full History: राजधानी दिल्ली का तुर्कमान गेट, 6 व 7 जनवरी 2026 की दरम्यानी रात, गरजते हुए 32 बुलडोजर, पथराव और बवाल। यह सब इन दिनों देश के दिल यानी दिल्ली ही नहीं, बल्कि देशवासियों के दिमाग में भी कौंध रहा है। क्योंकि यहां एमसीडी की अतिक्रमण हटाने की हालिया कार्रवाई को लेकर जमकर विवाद हुआ। इसके विरोध में स्थानीय लोगों ने पत्थरबाजी की और इसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
इस बुलडोजर एक्शन की गूंज उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में भी तब सुनाई देने लगी, जब पता चला कि रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्ला नदवी भी पथराव के दौरान मौके पर मौजूद थे। खैर! इस तरह की कोई भी घटना हो उसका सियासी मौजू निकल ही आता है। यही वजह है कि इस घटना ने इमरजेंसी के दौरान हुई कुछ घटनाओं की स्मृतियों को ताज़ा कर दिया है।
आखिर क्या है तुर्कमान गेट का इतिहास?
तुर्कमान गेट इलाका पुरानी दिल्ली की तंग और घुमावदार गलियों के बीच बसा हुआ है। तुर्कमान गेट खुद एक चौकोर, बिना सजावट वाली इमारत है जो पुरानी पत्थर और प्लास्टर से बनी है। इसे मुगल काल में बनाया गया था। तुर्कमान गेट का भारतीय इतिहास में एक खास जगह है।
सम्बंधित ख़बरें
Explainer: LPG संकट से पेट्रोल-डीजल तक… US-ईरान सीजफायर से भारत को क्या होगा फायदा? जानें सबकुछ
Explainer: अमेरिका-ईरान में सीजफायर, फिर लेबनान में बमबारी क्यों? समझिए इजरायल के ‘बफर जोन’ प्लान का सच
8 अप्रैल का इतिहास : सेंट्रल असेंबली बम कांड, आजादी की लौ जलाने वाले मंगल पांडे को फांसी
Explainer: सिर्फ आग और धुआं नहीं, मिसाइल हमले के पीछे काम करता है ये जटिल सिस्टम, जानें कैसे मचती है तबाही
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी 1976 में तुर्कमान गेट आए थे, जिसके बाद इस इलाके में बुलडोजर से बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की गई थी। तब माहौल इससे कई गुना भयावह था। वो घटना क्या है और उस वक्त क्या कुछ हुआ था? जानेंगे। लेकिन उससे पहले ‘तुर्कमान गेट’ को जान लेते हैं।
शाहजहां काल में बना तुर्कमान गेट
तुर्कमान गेट का निर्माण 17वीं सदी में मुगल बादशाह शाहजहां के शासनकाल में हुआ था, जिन्होंने शाहजहानाबाद को अपनी राजधानी बनाया था। इस जगह का ऐतिहासिक महत्व मुगल काल से भी पुराना है, इसकी जड़ें उस समय से जुड़ी हैं जब दिल्ली सूफीवाद का एक बड़ा केंद्र थी।
जानी मानी इतिहासकार स्वप्ना लिडल ने अपनी किताब चांदनी चौक: दि मुगल सिटी ऑफ दिल्ली में लिखा है कि की शाहजहानाबाद खाली जमीन पर नहीं, वरन् पुरानी बस्तियों, दरगाहों और सड़कों से मिलकर बना था। दि इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में भी उन्होंने इस बात का जिक्र किया है कि उत्तर-पश्चिम में फतेहपुरी मस्जिद से तुर्कमान गेट तक जाने वाली सड़क अहम रास्ता थी, जिसके किनारे पुरानी इमारतें खड़ीं थीं।
‘तुर्कमान गेट’ ही क्यों दिया गया नाम?
स्वप्ना ने साक्षात्कार में यह भी बताया कि इसी सड़क के किनारे ‘शाह तुर्कमान बयाबानी’ नाम के एक सूफी संत रहते थे। मौत के बाद उन्हें यहीं दफनाया गया। जिसके बाद उनकी दरगाह हौज काजी जाने वाली सड़क पर बनाई गई। इस दरगाह के बगल में हीरजिया सुल्तान की कब्र भी मौजूद है। आपको यह भी बता दें कि रजिया सुल्तान 13वीं शताब्दी में दिल्ली की हुकूमत चलाने वाली पहली और एकमात्र महिला शासक थीं।
तुर्कमान गेट पर संजय गांधी (सोर्स- सोशल मीडिया)
जब शाहजहानाबाद की शहर की दीवारें बनाई गईं, तो पुरानी बस्तियों को इन दीवारों के अंदर शामिल कर लिया गया। शाह तुर्कमान की दरगाह के सबसे पास वाले गेट को तुर्कमान दरवाज़ा या तुर्कमान गेट कहा जाता था, और तब से इस इलाके को तुर्कमान गेट के नाम से भी जाना जाता है।
1857 विद्रोह का गवाह है तुर्कमान गेट
तुर्कमान गेट 1857 के विद्रोह औपनिवेशिक शासन और बंटवारे की उथल-पुथल के बावजूद सही-सलामत रहा। 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने तुर्कमान गेट के दोनों ओर शहर की दीवारों के कुछ हिस्सों को गिरा दिया। 20वीं सदी की शुरुआत में दीवारों के और भी हिस्से हटा दिए गए। लेकिन तुर्कमान गेट खुद खड़ा रहा।
संजय ने चलाया सुंदरीकरण अभियान
1970 के दशक के बीच में संजय गांधी के दिल्ली में ‘सुंदरीकरण’ अभियान के कारण तुर्कमान गेट राजनीतिक सुर्खियों में आया। इस अभियान में झुग्गियों और अवैध बस्तियों को गिराया गया। यह अभियान संजय गांधी द्वारा चलाए गए एक बहुत ही आक्रामक परिवार नियोजन कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ था।
तुर्कमान गेट की कहानी (इन्फोग्राफिक- AI)
अप्रैल 1976 में ‘सुंदरीकरण’ अभियान ने इस चारदीवारी वाले शहर के इलाके को निशाना बनाया, जहां ज़्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग रहते थे। इमरजेंसी पर अपने संस्मरण में अर्थशास्त्री अशोक चक्रवर्ती लिखते हैं कि संजय गांधी 1976 की शुरुआत में तुर्कमान गेट गए थे और वहां मिले विरोध से नाराज़ हो गए थे।
संजय ने क्यों लिया था यह बड़ा फैसला
चक्रवर्ती बताते हैं कि यह भी कहा जाता है कि संजय गांधी को तुर्कमान गेट के आसपास की इमारतें पसंद नहीं थीं क्योंकि वे उन्हें जामा मस्जिद का नज़ारा देखने में रुकावट डालती थीं। रिपोर्टों के अनुसार, इसी वजह से तुर्कमान गेट के आसपास की झुग्गियों और इमारतों को गिराने का फैसला लिया गया।
13 अप्रैल 1976 को गरजे थे बुलडोजर
13 अप्रैल 1976 को पहली बार तुर्कमान गेट इलाके में बुलडोज़र आए। बाहरी इलाकों में झुग्गियों को गिराए जाने पर ज़्यादा विरोध नहीं हुआ, लेकिन जब जामा मस्जिद से लगभग 2 किलोमीटर दूर दुजाना हाउस में एक परिवार नियोजन क्लिनिक खोला गया तो विरोध प्रदर्शन भड़क उठे।
रुखसाना की क्लीनिक और नसबंदी
यह परिवार नियोजन क्लिनिक रुखसाना सुल्ताना चला रही थीं। रुखसाना संजय गांधी की करीबी एक सोशल वर्कर थीं। कई लोगों ने गवाही दी कि पुरुषों और महिलाओं पर पैसे और अन्य प्रोत्साहनों के बदले नसबंदी करवाने का दबाव डाला गया। इसी बात ने विद्रोह को हवा दे दी।
यह भी पढ़ें: गजनवी-खिलजी-औरंग ने मिटाया; भीम-अहिल्या और पटेल ने बनाया, सोमनाथ मंदिर ने 1000 साल में क्या कुछ देखा
मानवविज्ञानी एम्मा टार्लो अपनी किताब अनसेटलिंग मेमोरीज: नैरेटिव्स ऑफ द इमरजेंसी इन दिल्ली में लिखती हैं, “इलाके के लोगों ने देखा कि भिखारियों को सड़कों से पकड़कर बेसमेंट क्लिनिक में ले जाया गया, जहां से कुछ लोग कभी बाहर नहीं निकले।”
तोड़-फोड़ ने इलाके में फैला दी दहशत
जैसे-जैसे तुर्कमान गेट पर तोड़फोड़ जारी रही। वैसे-वैसे निवासियों में दहशत फैलती गई। लोगों को डर था कि उनके घर भी अगले शिकार होंगे। कुछ लोगों ने सुल्ताना से मदद मांगी। एम्मा टार्लो लिखती हैं कि सुल्ताना ने इस शर्त पर मदद करने के लिए सहमति दी कि निवासी इलाके में एक परिवार नियोजन क्लिनिक खोलने की अनुमति देंगे और एक सप्ताह के भीतर 300 नसबंदी की जाएंगी।
आंसू गैस, लाठी चार्ज और पत्थरबाजी
19 अप्रैल को जब बुलडोजर पड़ोस में घुसे तो लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। उन्होंने दुजाना हाउस में स्थापित परिवार नियोजन केंद्र पर हमला किया। पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज से जवाब दिया। पूरे दिन झड़पें जारी रहीं। प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके और पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में गोलियां चलाईं।
मलबे के साथ ही साथ हटा दिए गए शव
इस बीच तोड़फोड़ को पूरा करने के लिए और बुलडोजर लाए गए। अशोक चक्रवर्ती बताते हैं कि मलबे के साथ-साथ शवों को भी हटाया गया, जिसमें कई घायल लोगों के शव भी शामिल थे और सभी को एक कचरा स्थल पर फेंक दिया गया। इलाके में तोड़फोड़ 10 दिनों तक जारी रही।
यह भी पढे़ं: क्या है कार्तिगई दीपम विवाद? जिसने तमिलनाडु में बिछाई सियासी बिसात, चुनाव में BJP को मिलेगा फायदा!
पत्रकार जॉन दयाल और अजय बोस ने अपनी किताब फॉर रीजन्स ऑफ स्टेट: दिल्ली अंडर इमरजेंसी में लिखा है, “22 अप्रैल तक, बुलडोजर चौबीसों घंटे काम कर रहे थे जब तक कि उन्होंने तुर्कमान गेट पर जीवन और मृत्यु के सभी निशान मिटा नहीं दिए।”
400 लोग की मौत 1000 से ज्यादा घायल
जीवित बचे लोगों के बयानों के अनुसार, लगभग 400 लोग मारे गए और 1,000 से अधिक घायल हुए। तुर्कमान गेट की घटनाओं की जांच शाह आयोग ने की थी, लेकिन आयोग की रिपोर्ट के बावजूद किसी पर भी मुकदमा नहीं चलाया गया और न ही किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को दंडित किया गया।
Frequently Asked Questions
-
Que: तुर्कमान गेट का निर्माण कब हुआ और इसे किसने बनवाया था?
Ans: तुर्कमान गेट का निर्माण 17वीं सदी में मुगल बादशाह शाहजहां के शासनकाल में हुआ था, जिन्होंने शाहजहानाबाद को अपनी राजधानी बनाया था।
-
Que: 1976 के तुर्कमान गेट बुलडोजर एक्शन में कितने लोग मारे गए थे?
Ans: जीवित बचे लोगों के बयानों के अनुसार, 1976 के तुर्कमान गेट बुलडोजर एक्शन में लगभग 400 लोग मारे गए और 1,000 से अधिक घायल हुए।
-
Que: 1857 में तुर्कमान गेट पर क्या कुछ हुआ था?
Ans: तुर्कमान गेट 1857 के विद्रोह औपनिवेशिक शासन और बंटवारे की उथल-पुथल के बावजूद सही-सलामत रहा। 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने तुर्कमान गेट के दोनों ओर शहर की दीवारों के कुछ हिस्सों को गिरा दिया।
Turkman gate timeline shah jahan sanjay gandhi 1857 uprising 1976 emergency and 2026 action1506168
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
थिएटर में गर्दा उड़ाने के बाद OTT पर भी धमाका करेगी ‘Dhurandhar 2’, जानिए कब और कहां होगी रिलीज
Apr 09, 2026 | 09:55 PMबेंगलुरु की सड़क पर जोंबी जैसा खड़ा दिखा युवक! क्या भारत में आ गया अमेरिका वाला खतरनाक ड्रग? वीडियो वायरल
Apr 09, 2026 | 09:53 PMविवादों के घेरे में आया फिन एलन का कैच, सोशल मीडिया पर OUT और Not Out को लेकर हो रही बहस, देखें वीडियो
Apr 09, 2026 | 09:48 PMहरदीप सिंह पुरी का कतर दौरा, ईरान संघर्ष के बीच एलएनजी सप्लाई पर करेंगे अहम बातचीत
Apr 09, 2026 | 09:37 PMKKR vs LSG: केकेआर ने लखनऊ सुपर सुपर जायंट्स के सामने खड़ा 181 रन का टोटल, पॉवेल ने खेली तेज-तर्रार पारी
Apr 09, 2026 | 09:34 PMइटावा रेलवे स्टेशन पर शर्मनाक! भगवाधारी बुजुर्ग को चोटी पकड़कर घसीटा, बेरहमी से पिटाई का वीडियो वायरल
Apr 09, 2026 | 09:32 PMममता बनर्जी को हराने के लिए 1000 करोड़ की साजिश! बंगाल राजनीति का सबसे बड़ा वीडियो लीक, ED जांच की मांग
Apr 09, 2026 | 09:26 PMवीडियो गैलरी

ममता का मास्टरप्लान या भाजपा की अंदरूनी कलह? पहले चरण की वोटिंग से पहले बदल गया पूरा नैरेटिव!
Apr 09, 2026 | 07:08 AM
कानपुर के ‘किडनी कांड’ को लेकर अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर साधा निशाना, कही बड़ी बात
Apr 08, 2026 | 10:49 PM
SDM के सामने जल निगम अधिकारियों पर क्यों भड़के भाजपा विधायक रत्नाकर मिश्रा
Apr 08, 2026 | 10:37 PM
उधार के शब्द और सरेआम फजीहत! शहबाज शरीफ के पोस्ट में निकली ऐसी गलती, पूरी दुनिया में उड़ रहा है मजाक
Apr 08, 2026 | 10:27 PM
बुद्ध और गांधी का देश अलग-थलग, आतंकी पाकिस्तान बना शांति दूत; संजय सिंह का PM मोदी पर बड़ा हमला- VIDEO
Apr 08, 2026 | 09:59 PM
सफाई के नाम पर खेल! गांधीधाम स्टेशन पर डस्टबिन का कचरा ट्रैक पर फेंका, वायरल वीडियो देख रेलवे ने मांगी माफी
Apr 08, 2026 | 09:51 PM














