नवभारत विशेष: लगातार महंगा होता जा रहा पेट्रोल-डीजल, 11 दिनों में 4 बार दाम बढ़ाए

Fuel Price Hike: पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक खाद और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बचत की अपील की। बढ़ती तेल कीमतों से महंगाई पर चिंता बढ़ी है।
Navbharat Special: Petrol and Diesel Continue to Get More Expensive; Prices Hiked 4 Times in 11 Days.
पेट्रोल डीजल कीमत,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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India Fuel Price Surge: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बाद वैश्विक खाद के दामों में अकल्पनीय वृद्धि हो गई है। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वर्तमान स्थिति में वह उएफ-फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइनर (खाद) व फोरेक्स की बचत पर फोकस करें। स्थानीय लेवी के कारण हर राज्य में पेट्रोल व डीजल की कीमत समान नहीं होती। दिल्ली में अब पेट्रोल 102.12 रुपए प्रति लीटर हो गया है और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपए प्रति लीटर और डीजल 97.81 रुपए प्रति लीटर हो गया है।

कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपए प्रति लीटर और डीजल 99.82 रुपए प्रति लीटर हो गया है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 99.55 रुपए प्रति लीटर हो गया है। तेल के दाम अब मई 2022 के बाद इस समय सबसे अधिक हैं, जबकि 2 वर्ष से अधिक तक वह लगभग स्थिर रहे थे। आश्चर्य की बात तो यह है कि भारत में तेल के दाम उस समय बढ़ाए गए, जब बेंट क्रूड में 5 प्रतिशत की गिरावट आई। भारत में तेल पर दोनों केंद्र व राज्यों की लेवी बहुत अधिक है। अगर इसे कम कर दिया जाए तो तेल के दामों को कम रखा जा सकता है। लेकिन सरकारें अपनी व कंपनियों की कमाई को कम करने की बजाय आमजन की जेब पर ही बोझ डालना चाहती हैं, उनसे ही बचत व बलिदान की उम्मीद रखी जाती है।

केंद्र सरकार की पेट्रोल पर प्रति लीटर लेवी 19.90 रुपए है और राज्य सरकारों का स्थानीय सेस के साथ अलग-अलग वैल्यू एडेड टैक्स (बैट) है। इन करों को जब जोड़ दिया जाता है, तो वह पंप पर जिस भाव फुटकर तेल मिलता है उसका लगभग 50-55 प्रतिशत हिस्सा बैठता है। अगर आपके शहर में 100 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल पंप पर मिल रहा है, तो उसमें से 50-55 रुपए केंद्र व राज्य सरकार को जेब में जाते हैं। अगर सरकारें देश हित में अपनी कमाई को आधा कर दें तो पेट्रोल आसानी से 70-75 रुपए प्रति लीटर मिल सकता है। इस तथ्य पर इलेक्ट्रॉनिक चैनल का कोई एंकर कभी चर्चा नहीं करेगा। वह तो पब्लिक को यह सम्झाने का प्रयास करेगा कि युद्ध की वजह से संकट है या महंगाई की तुलना पाकिस्तान से करने लगेगा।

महंगाई की मार: बढ़ती कीमतों ने बदली आम लोगों की थाली

जब कच्चा तेल 45-50 डॉलर प्रति बैरल हो गया था, तब भी सरकारों व तेल कंपनियों ने अपने मुनाफे को कम नहीं किया था और तरह-तरह के बहाने बनाकर महंगा तेल ही बेचा जा रहा था। उस समय अन्य देशों ने अपने यहां तेल के दाम घटाए थे। महंगाई का असर यह हुआ है कि जिन घरों की औसत आय 8-10 हजार रुपए मासिक है, उन्होंने सुबह नाश्ते में पूरी-कचौड़ी या पराठे की जगह सूखी रोटी खानी शुरू कर दी है। क्योंकि जो सरसों का तेल कुछ माह पहले तक 190 रुपए प्रति लीटर मिल रहा था, अब वह 225 रुपए प्रति लीटर हो गया है।

दिन में चाय 3 बार की जगह सिर्फ 1 बार बनने लगी है। क्योंकि कुकिंग गैस सिलेंडर 850 रुपए की जगह 910 रुपए का हो गया है। स्कूटर को कपड़ा ढककर एक तरफ खड़ा कर दिया है, क्योंकि पेट्रोल 100 रुपए प्रति लीटर से अधिक का मिलने लगा है और बच्चे फलों के लिए तरसते हैं। क्योंकि बचत सारी खत्म हो गई है और आमदनी में वृद्धि होने की बजाय कमी हुई है या वह कुछ वर्षों से स्थिर है। बढ़ते दामों का दबाव उस समय आया है, जब अर्थव्यवस्था मंदी से गुजर रही है और डॉलर के मुकाबले में रुपया शतक लगाने के करीब पहुंच गया है।

11 दिनों में 4 बार दाम बढ़ाए

आमिर खान प्रोडक्शंस ने अपने एक्स अकाउंट पर निरंतर बढ़ती महंगाई पर चिंता व्यक्त की साथ ही अपनी 2010 की चर्चित फिल्म 'पीपली लाइव' के गाने 'सखी, सईयां तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाये जात है' गाने का क्लिप भी शेयर किया। कुछ ही देर में इस पोस्ट के हजारों रि-पोस्ट हो गए। सोशल मीडिया पर इस गीत को बहुत अधिक शेयर किया जा रहा है। क्योंकि 15 मई के बाद अगले 11 दिनों के भीतर 4 बार पेट्रोल व डीजल के दाम बढाए गए हैं और वह लगभग 8-8 रुपए प्रति लीटर महंगे हो चुके हैं। चूंकि तेल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ता है, इसलिए हर चीज महंगी हो जाती है। इसके अतिरिक्त चिंता की बात यह है कि खाद के न सिर्फ दाम बढ़ रहे हैं बल्कि खाद की किल्लत भी है, जिससे किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

लेख-नौशाबा परवीन के द्वारा

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