
कॉन्सेप्ट फोटो (एआई जनरेटेड एंड मोडिफाइड)
Somnath Mandir History: सोमनाथ मंदिर पर आक्रांता महमूद ग़ज़नवी के पहले हमले के 1000 साल पूरे हो गए हैं। 11 जनवरी को पीएम मोदी सौराष्ट्र पहुंचकर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ समारोह में हिस्सा लेंगे। यह पर्व जो 1026 में मंदिर पर हुए पहले बड़े हमले की 1000वीं सालगिरह की याद में मनाया जा रहा है। यह साल भर चलने वाला कार्यक्रम 8 से 11 जनवरी तक खास कार्यक्रमों के साथ शुरू होगा।
सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग है, अटूट है और अटल है। सोमनाथ भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि मंदिरों में से एक है। अगणित बलिदानों के साक्षी रहे इस मंदिर का अतीत हजारों साल पुराना है। सोमनाथ ने अफगानी आक्रातांओं का आतंक देखा, मुगलों का जुल्म-ओ-सितम देखा, अंग्रेजी हुकूमत की बर्बरता को देखा, लेकिन सब बीत गए। सोमनाथ आज भी कायम है और सदियों तक रहेगा।
भारतीय धार्मिक ग्रंथों में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों का जिक्र है। सोमनाथ को इन ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि सोमनाथ मंदिर का निर्माण चंद्रमा देवता सोमराज ने करवाया था। यह मंदिर ऋग्वैदिक कालीन है। गुजरात के सौराष्ट्र में वेरावल के पास समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर प्रभास पाटन के किनारे पर है। समुद्र के पास होने के कारण यह हमलावरों के लिए आसानी से पहुंचने योग्य था। इस मंदिर पर शायद भारत के किसी भी दूसरे मंदिर से ज्यादा हमले हुए हैं।
भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक सोमनाथ मंदिर को इतिहास में बार-बार लूटा गया। इसकी प्रसिद्धि इतनी थी कि अरब यात्री अल-बिरूनी ने अपनी यात्रा वृत्तांत ‘किताब-उल-हिंद’ में इसका वर्णन किया था। अल-बिरूनी 11वीं सदी के एक जाने-माने फारसी विद्वान थे जो महमूद ग़ज़नवी के साथ भारत आए थे। अपनी किताब, तहक़ीक़-ए-हिंद में उन्होंने मंदिर को विशाल बताया है। इस मंदिर में जिसमें सैकड़ों मंदिर नर्तक और सैनिक रहते थे। उन्होंने इसे हिंदुओं के पवित्र स्थलों में शामिल किया और विशेष रूप से सोमनाथ मंदिर का नाम लिया। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर समुद्र के किनारे स्थित था। यहां एक ऐसा बंदरगाह भी जहां चीन और जंज (पूर्वी अफ्रीका) के बीच यात्रा करने वाले जहाज रुकते थे।
यह मंदिर ईसा मसीह के जन्म से भी पहले मौजूद था। इसे 7वीं सदी में वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने फिर से बनवाया था। कुछ ऐतिहासिक ग्रंथों में जिक्र है कि सिंध के अरब गवर्नर जुनैद ने इसे नष्ट करने की कोशिश की थी। तब भी यह मंदिर दुनिया के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक था। इतिहासकारों का कहना है कि गुर्जर-प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में इसे तीसरी बार बनवाया था।
अल-बिरूनी ने अपने यात्रा वृत्तांत तहक़ीक़-ए-हिंद में 1025-26 ईस्वी में महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण का वर्णन किया है। अल-बिरूनी ने लिखा कि गज़नवी ने मंदिर में शिव की मूर्ति को तोड़ा और सोना और गहने लूट लिए। महमूद ग़ज़नवी ग़ज़नी का सुल्तान था। वह एक बहुत शक्तिशाली तुर्की शासक था और अपनी क्रूरता के लिए बदनाम था। उसने भारत पर 17 बार हमला किया। उसने बार-बार सोमनाथ मंदिर को लूटा।
सोमनाथ मंदिर (सोर्स- सोशल मीडिया)
गज़नवी का पहला हमला 1025-26 ईस्वी में हुआ था। वहां उसने सैकड़ों लोगों को मार डाला, संपत्ति लूटी और भाग गया। उस समय सोमनाथ मंदिर भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक था। ग़ज़नवी ने वहां से भारी मात्रा में सोना, चांदी और कीमती रत्न लूटे। उसने न सिर्फ धन लूटा, बल्कि शिवलिंग को भी अपवित्र किया। हमले के दौरान हज़ारों निहत्थे पुजारियों और भक्तों का नरसंहार किया गया। मंदिर की रक्षा करने आए हर व्यक्ति को मार डाला गया। यह मध्यकालीन भारत में विदेशी हमलावरों के सबसे बर्बर कृत्यों में से एक था। ग़ज़नवी के हमले के बाद मंदिर खंडहर बन गया। अल-बिरूनी ने लिखा है कि ग़ज़नवी ने इसके ऊपरी हिस्सों को भी नष्ट करने का आदेश दिया था।
जब 1025-26 ईस्वी में महमूद ग़ज़नवी ने सोमनाथ पर हमला किया, तो भीमदेव प्रथम गुजरात के शासक थे। कहा जाता है कि हमले की खबर सुनकर, उन्होंने सीधे लड़ाई करने के बजाय रणनीतिक रूप से कच्छ के कंठकोट किले में पीछे हटने का फैसला किया, ताकि वे बाद में अपनी सेना को फिर से इकट्ठा कर सकें। हज़ारों भक्तों और स्थानीय योद्धाओं ने मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन ग़ज़नवी इसे लूटने और नष्ट करने में सफल रहा। ग़ज़नवी के जाने के तुरंत बाद राजा भीमदेव ने मालवा के राजा भोज के साथ मिलकर मंदिर के पुनर्निर्माण का काम शुरू किया। भीमदेव ने सोमनाथ मंदिर को पत्थर से फिर से बनवाया।
इस्लामिक आक्रांता कभी नहीं चाहते थे कि सोमनाथ मंदिर अपनी आज़ादी बनाए रखे। 1297 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलुग खान और नुसरत खान ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया। इसे महमूद ग़नवी के हमले के बाद सोमनाथ मंदिर पर दूसरा सबसे बड़ा और विनाशकारी हमला माना जाता है। खिलजी की सेना ने गुजरात के तत्कालीन वाघेला राजा करण देव को युद्ध में हराया और मंदिर को लूट लिया। लुटेरों ने मंदिर की मूर्तियों को अपवित्र किया और उसकी दौलत लूट ली।
इस हमले के बाद जूनागढ़ के राजा महिपाल देव ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। सोमनाथ मंदिर का इतिहास विनाश और पुनर्निर्माण की एक लंबी गाथा है। जिसमें ग़ज़नवी और खिलजी के अलावा औरंगजेब का नाम भी प्रमुखता से आता है। अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के कुछ साल बाद सौराष्ट्र के राजा महिपाल देव प्रथम ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। उन्होंने लगभग 1308 ईस्वी में मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू किया। मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद उनके बेटे राजा खंगार ने मंदिर में मूर्तियों को फिर से स्थापित किया।
सोमनाथ मंदिर इन्फोग्राफिक (AI जनरेटेड)
साल 1965 में औरंगजेब ने हिंदुस्तान में सत्ता संभाली ही थी कि उसने पुराने हिंदू मंदिरों को गिराने का फरमान जारी कर दिया। पहला हमला 1665 में हुआ और इसके कुछ साल बाद ही 1706 ईस्वी में एक और भीषण हमला हुआ। अपने जीवन के अंतिम दिनों में उसकी सेना ने सोमनाथ मंदिर को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। मिरात-ए-अहमदी में यह भी उल्लेख है कि इस मंदिर को मस्जिद में बदलने का प्रयास किया गया था।
1706 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर खंडहर में बदल गया था। मालवा साम्राज्य की महारानी अहिल्याबाई होल्कर को एक ऐसे शासक के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने देश भर में मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया। उन्होंने 1783 में सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। उन्होंने मुख्य खंडहर मंदिर के पास एक नया मंदिर बनवाया, जिसे अब ‘पुराना सोमनाथ मंदिर’ या ‘अहिल्याबाई मंदिर’ कहा जाता है। उन्होंने मंदिर को भूमिगत बनवाया ताकि यह हमलावरों को आसानी से दिखाई न दे और पूजा में कोई बाधा न आए।
15 अगस्त 1947 को जब देश ने स्वंत्रता की सुबह देखी तो सोमनाथ मंदिर एक नए युग में प्रवेश कर गया। आधुनिक सोमनाथ मंदिर सरदार वल्लभभाई पटेल की देन है। 12 नवंबर 1947 को जूनागढ़ के भारत में विलय के बाद उन्होंने सोमनाथ के तट पर मंदिर को फिर से बनाने की कसम खाई। मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए ‘सोमनाथ ट्रस्ट’ की स्थापना की गई।
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लोगों ने मंदिर के निर्माण के लिए दिल खोलकर दान दिया। सरदार पटेल की मृत्यु के बाद 11 मई 1951 को भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने नए मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा की। उस दौरान नेहरू की सरकार थी लेकिन उन्होंने धर्मनिरपेक्ष छवि को बनाए रखने के लिए उद्घाटन कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। फिलहाल तब से सोमनाथ मंदिर भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग बना हुआ है। हर महीने लाखों लोग मंदिर में दर्शन करने आते हैं।
Ans: गुजरात के सौराष्ट्र स्थिति प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर पर कुल 17 बार हमला हुआ और इसे लूटा गया।
Ans: औरंगजेब के शासनकाल में सोमनाथ मंदिर पर दो हमले हुए। पहला हमला 1665 में हुआ और इसके कुछ साल बाद ही 1706 ईस्वी में एक और भीषण हमला हुआ।
Ans: आधुनिक सोमनाथ मंदिर सरदार वल्लभभाई पटेल की देन है। 12 नवंबर 1947 को जूनागढ़ के भारत में विलय के बाद उन्होंने सोमनाथ के तट पर मंदिर को फिर से बनाने की कसम खाई थी।






