दादी-नानी का वो पुराना नुस्खा जो आज भी है सुपरफूड, जानें बबूल से लेकर कतीरा गोंद के हैरान करने वाले फायदे

Benefits of Gond: आज के समय में लोग महंगे और विदेशी सुपरफूड्स की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं जबकि हमारी दादी-नानी के पुराने नुस्खे आज भी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।
gond benefits
गोंद (सौ. फ्रीपिक)
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Health Tips: आयुर्वेद में पेड़ों के अर्क यानी गोंद को ऊर्जा का पावरहाउस माना गया है। यह न केवल शरीर की कमजोरी दूर करते हैं बल्कि हड्डियों, त्वचा और पाचन से जुड़ी गंभीर समस्याओं में भी प्रभावी हैं। अगर आप भी बार-बार बीमार पड़ते हैं तो इन औषधीय गोंद का सही चुनाव आपकी सेहत बदल सकता है।

भारतीय चिकित्सा पद्धति में गोंद का उपयोग सदियों से शक्तिवर्धक और औषधि के रूप में किया जा रहा है। अलग-अलग पेड़ों से निकलने वाले इन गोंद की तासीर और गुण अलग होते हैं। आइए जानते हैं किस समस्या में कौन सा गोंद आपकी मदद कर सकता है।

हड्डियों और शारीरिक शक्ति के लिए

बबूल गोंद: यह जोड़ों के दर्द और हड्डियों की मजबूती के लिए सबसे प्रसिद्ध है। प्रसव के बाद महिलाओं की कमजोरी दूर करने में यह अचूक है।

मोरिंगा (सहजन) गोंद: अगर आप जल्दी थक जाते हैं तो यह आपकी इम्यूनिटी बढ़ाने और थकान दूर करने में सहायक है।

धावडा गोंद: यह शरीर को नई ऊर्जा देता है और पुराने घावों को भरने में मदद करता है।

पेट और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए

कतीरा गोंद: इसकी तासीर ठंडी होती है। गर्मी में लू, पेशाब की जलन और कब्ज से राहत पाने के लिए इसका सेवन श्रेष्ठ है।

बेल और इमली का गोंद: ये दोनों ही पेट की गर्मी को शांत करते हैं और पेचिश (Dysentery) व आंतों की समस्याओं में सुधार करते हैं।

हींग का गोंद: गैस, अपच और पेट दर्द के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।

त्वचा और रक्त शुद्धि के लिए

नीम का गोंद: चर्म रोग, फोड़े-फुंसी और खून साफ करने के लिए नीम के गोंद का उपयोग किया जाता है। राल और साल गोंद: ये त्वचा की सूजन को कम करने और किसी भी प्रकार के संक्रमण को रोकने में प्रभावी हैं।

गंभीर बीमारियों में राहत

अर्जुन का गोंद: हृदय रोगियों के लिए यह बहुत लाभकारी है। यह हाई बीपी और दिल की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।

गुग्गुल और शल्लकी: इन्हें गठिया और कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए आयुर्वेद में प्रमुखता दी जाती है।

अशोक का गोंद: यह महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म और अन्य स्त्री रोगों को ठीक करने में सहायक है।

पीपल का गोंद: सांस संबंधी समस्याओं जैसे दमा और पुरानी खांसी में इसका सेवन राहत देता है।

मानसिक स्वास्थ्य और अन्य लाभ

मानसिक शांति और सिरदर्द के लिए लोबान का उपयोग किया जाता है जबकि मुंह के छालों में खैर का गोंद तुरंत असर दिखाता है।

डिस्क्लेमर: हालांकि ये सभी प्राकृतिक हैं लेकिन इनकी तासीर गरम या ठंडी हो सकती है। इस लेख में दिए गए सुझाव केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।

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