संसद में सड़क दुर्घटनाओं का मुद्दा, सांसद मेधा कुलकर्णी ने सख्त कानून और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की मांग की

BJP MP Medha Kulkarni ने संसद में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि 2024 में देश में 1.78 लाख लोगों की मौत हुई और सरकार से कड़े कानून व फास्ट-ट्रैक अदालतों की मांग की।
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road accident (सोर्सः सोशल मीडिया)
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India Road Accident 2024: भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ने संसद में सड़क दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाया है। उन्होंने सरकार से इस समस्या पर कठोर कदम उठाने की मांग की है।

सांसद कुलकर्णी ने राज्यसभा में शून्य काल में विशेष उल्लेख के दौरान उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में भारत में लगभग 1.78 लाख लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में हुई है।

इसका अर्थ है कि प्रतिदिन सैकड़ों परिवार इस त्रासदी का सामना कर रहे हैं। दुर्भाग्यवश हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है और भी चिंताजनक तथ्य यह है कि इन दुर्घटनाओं में लगभग 60 प्रतिशत पीड़ित 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवा हैं। जो देश की सबसे उत्पादक और ऊर्जावान आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

राज्य सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2024 में महाराष्ट्र में कुल 36,084 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। जिनमें 15,335 लोगों की मृत्यु हुई है। विशेष रूप से पुणे में स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। पुणे पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 1,404 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई। जिनमें 320 लोगों की मृत्यु हुई तथा 1,320 लोग घायल हुए।

वर्ष 2023 में दुर्घटनाओं की संख्या 1,230 थी। यह वृद्धि स्पष्ट रूप से संकेत देती है कि स्थिति गंभीर होती जा रही है और त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता है। पिछले कुछ वर्षों में केवल पुणे में ही 1,200 से अधिक लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में हो चुकी है।

सोशल मीडिया के लिए सड़कों और राजमार्गों पर रील या फोटो शूट करने की बढ़ती प्रवृत्ति भी यातायात में बाधा उत्पन्न करती है और दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ाती है। सांसद कुलकर्णी ने कहा यद्यपि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अंतर्गत नशे में वाहन चलाने तथा लापरवाहीपूर्ण ड्राइविंग के लिए कठोर दंड का प्रावधान है। लेकिन कई स्थानों पर प्रभावी क्रियान्वयन के अभाव के कारण इसका अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है।

इन दुर्घटनाओं में अक्सर निर्दोष पैदल यात्री, बच्चे और सामान्य नागरिक अपनी जान गंवा देते हैं या स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं। साथ ही जांच में देरी, शीघ्र जमानत तथा लंबित मुकदमों के कारण पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय भी नहीं मिल पाता है। सड़क सुरक्षा केवल यातायात प्रबंधन का विषय नहीं है बल्कि यह जनस्वास्थ्य, सुशासन और उत्तरदायित्व से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है।

सांसद मेधा कुलकर्णी की सरकार से मांग

  • नशे में ड्राइविंग और खतरनाक ड्राइविंग के मामलों में कठोर न्यूनतम दंड सुनिश्चित किया जाएं।
  • सड़क दुर्घटना मृत्यु से जुड़े मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक न्यायालय स्थापित किए जाएं।
  • एआई आधारित स्पीड डिटेक्शन सिस्टम, ब्रीथ एनालाइज़र तथा सीसीटीवी निगरानी का व्यापक विस्तार किया जाएं।
  • सड़कों और राजमार्गों पर रील या फोटो शूट करने जैसी खतरनाक गतिविधियों पर सख्त रोक लगाई जाएं।
  • विशेष रूप से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे जैसे उच्च गति वाले मार्गों पर दुर्घटना संभावित स्थलों का नियमित सुरक्षा ऑडिट किया जाएं।
  • सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों एवं उनके परिवारों को तत्काल और पर्याप्त आर्थिक मुआवजा प्रदान करने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएं।
  • विद्यालयों और महाविद्यालयों में सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार ड्राइविंग पर व्यापक देते हुए जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
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