गैस सप्लाई कटौती से पुणे का होटल उद्योग संकट में, कालाबाजारी में 2500 रुपये तक बिक रहा सिलेंडर

Pune में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी से होटल और रेस्तरां उद्योग गंभीर संकट में है। आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो शहर के लगभग 80 प्रतिशत भोजनालय बंद होने की आशंका जताई जा रही है।
LPG Gas Cylinder
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Pune Commercial LPG Crisis: महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और शैक्षिक राजधानी पुणे इन दिनों एक गंभीर ऊर्जा संकट की गिरफ्त में है। खाड़ी देशों में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थितियों ने पुणे के रसोई घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों की कमर तोड़ दी है।

कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में आई भारी कटौती ने शहर के होटल, रेस्तरां और मेस संचालकों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है।

स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि यदि अगले कुछ दिनों में आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो शहर के लगभग 80 प्रतिशत छोटे-बड़े भोजनालय बंद हो सकते हैं। रोजगार का संकट खड़ा होने की नौबतः पुणे में लगभग 10 हजार से अधिक होटल और रेस्तरां हैं, जिनमें से 85 प्रतिशत पूरी तरह से कमर्शियल सिलेंडरों पर निर्भर हैं।

स्टॉक जमा नहीं कर सकते

  • प्रशासन द्वारा घरेलू गैस आपूर्ति को प्राथमिकता दिए जाने के कारण कमर्शियल सिलेंडरों की उपलब्धता न के बराबर रह गई है।
  • होटल संचालकों का कहना है कि सुरक्षा नियमों के कारण वे भारी मात्रा में स्टॉक जमा नहीं रख सकते, और अब उनका मौजूदा बैकअप खत्म हो रहा है।
  • इस संकट के कारण पुणे के होटल उद्योग को रोजाना करीब 8 से 10 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। यह केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इस क्षेत्र में काम करने वाले हजारों वेटरों, रसोइयों और कर्मचारियों के रोजगार पर भी तलवार लटक गई है।

असामाजिक तत्व और बिचौलिए सक्रिय हुए

संकट के इस दौर में कालाबाजारी का काला खेल भी पूरी तेजी से शुरू हो गया है। मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व और बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं। आधिकारिक तौर पर जिस कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 900 रुपये के आसपास होनी चाहिए, वह चोर बाजार में 2000 से 2500 रुपये तक में बेचा जा रहा है।

दोगुनी-तिगुनी कीमतों पर खरीद रहे सिलेंडर

कोंढवा, बिबवेवाड़ी और मार्केट यार्ड जैसे धने बसे इलाकों में स्थिति और भी खराब है, जहां मजबूर होटल मालिक अपना काम चालू रखने के लिए दोगुनी-तिगुनी कीमतों पर गैस सिलेंडर खरीदने को विवश हैं।

इस बीच, केंद्र सरकार ने स्थिति को भांपते हुए तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब तक यह अतिरिक्त स्टॉक पुणे के गोदामों तक नहीं पहुंचता, तब तक कालाबाजारी करने वाले आम जनता की जेब ढीली करते रहेंगे।

एसोसिएशन का कहना है.....

पुणे रेस्टोरेंट्स एंड होटलियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेश शेट्टी ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि शहर में छात्रों और कामकाजी पेशेवरों की एक बड़ी आबादी मेस और छोटे भोजनालयों पर निर्भर है। यदि ये संस्थान बंद होते हैं, तो शहर में एक बड़ा खाद्य संकट पैदा हो जाएगा। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

लोगों से अपील की गई है कि वे घबराएं नहीं और अफवाहों पर ध्यान न दे। कमर्शियल आपूर्ति सीमित हुई है, लेकिन घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। नागरिक जरूरत के अनुसार ही गैस सिलेंडर बुक करें।

- महेश सुधालकर, जिला आपूर्ति अधिकारी

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