
नहाते हुए महिला (सौ. फ्रीपिक)
Ayurvedic Bathing Ritual: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर काम मशीन की तेजी से किया जा रहा है। खुद के लिए समय इतना कम है कि लोग खाना भी आराम से नहीं खा पाते और नहाने को तो महज एक काम समझकर जल्दबाजी में निपटा देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिसे आप केवल बाहरी सफाई समझ रहे हैं आयुर्वेद उसे संस्कार और चिकित्सा मानता है। सही विधि से किया गया स्नान न केवल तन को बल्कि मन को भी शुद्ध और ऊर्जावान बनाता है।
आयुर्वेद के अनुसार जब हमारे शरीर पर पानी पड़ता है तो पूरे शरीर में रक्त का संचार तेज हो जाता है। इसका सीधा संबंध हमारे शरीर के तापमान और पाचन शक्ति से है। नियमित स्नान से मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है और शरीर की जठराग्नि संतुलित होती है। यदि आप सुस्ती महसूस करते हैं या पाचन कमजोर है तो स्नान करने का सही तरीका आपके लिए किसी औषधि से कम नहीं है।
आधुनिक शोध भी आयुर्वेद की इस बात की पुष्टि करते हैं कि स्नान करने से शरीर में एंडोर्फिन यानी हैप्पी हार्मोन का स्तर बढ़ता है। यह तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कोर्टिसोल को कम करता है जिससे मन प्रसन्न रहता है। यदि आपको रात में नींद आने में परेशानी होती है तो गुनगुने पानी से स्नान आपके नर्वस सिस्टम को शांत कर गहरी नींद लाने में सहायक होता है।
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आयुर्वेद में स्नान की एक पूर्ण प्रक्रिया बताई गई है जिसे इन तीन चरणों में समझा जा सकता है।
स्नान शरीर के तापमान को नियंत्रित करने और थकान मिटाने का सबसे सरल साधन है। यदि आप पूर्ण स्नान नहीं कर सकते तो कम से कम गुनगुने पानी में कुछ देर पैर डुबोकर रखें। आयुर्वेद के इन सरल नियमों को अपनाकर आप एक स्वस्थ और तनावमुक्त जीवन की शुरुआत कर सकते हैं।






