मोहम्मद रफी का एक गाना सुनकर रोने लगते थे बालासुब्रमण्यम, कोराना से हार गए थे जंग, जानें बर्थ एनिवर्सरी पर किस्से

लीजेंड्री सिंगर एसपी बालासुब्रमण्यम भले ही अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन आज भी वह लोगों के दिलों में जिंदा है। वहीं 4 जून को सिंगर की 79वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर चलिए उनके बारे में जानते हैं।
SP Balasubrahmanyam
एसपी बालासुब्रमण्यम (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
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मुंबई: बॉलीवुड फिल्मों मैंने प्यार किया और साजन में सलमान खान की आवाज बनकर लोगों के दिलों पर राज करने वाले दिग्गज गायक एसपी बालासुब्रमण्यम को भला कौन नहीं जानता है। हालांकि, अब लीजेंड्री सिंगर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गाए हुए गीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों को छू जाते हैं। 4 जून को उनका जन्मदिन होता है, और इस खास मौके पर आइए उनकी जिंदगी और करियर के सुनहरे पलों को याद करें।

दरअसल, 4 जून 1946 को आंध्र प्रदेश के नेल्लूर में जन्मे एसपीबी को संगीत की दुनिया में ‘बालू’ और ‘एसपीबी’ जैसे नामों से भी पहचाना जाता है। उन्होंने 16 भाषाओं में 40 हजार से अधिक गाने गाकर एक ऐसा रिकॉर्ड कायम किया जो बेहद कम कलाकारों के हिस्से आता है। उनके पास 6 नेशनल फिल्म अवॉर्ड और 25 नंदी अवॉर्ड्स जैसी प्रतिष्ठित उपलब्धियां हैं। लेकिन कम लोग जानते हैं कि वे खुद एक महान गायक मोहम्मद रफी के बड़े प्रशंसक थे।

मोहम्मद रफी के गाने पर रो दिए थे सिंगर 

मोहम्मद रफी के प्रति एसपीबी की दीवानगी इतनी गहरी थी कि उन्होंने कई मंचों और इंटरव्यू में इसका जिक्र किया। एक बार एक रिएलिटी शो के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि जब वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान सुबह कॉलेज के लिए निकलते थे, तो रास्ते में रफी साहब का गाना "दीवाना हुआ बादल" सुनते थे। जैसे ही लाइन "ये देख के दिल झूमा..." आती थी, उनकी आंखों से आंसू बहने लगते थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें आज तक नहीं पता चला कि वो आंसू क्यों आते थे। शायद रफी की आवाज में कोई दैवीय शक्ति थी जो दिल को सीधे छू जाती थी।

कई भाषाओं में सिंगर ने दी थी अपनी आवाज

एसपीबी का जीवन पूरी तरह संगीत को समर्पित था। उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी समेत कई भाषाओं में अनगिनत हिट गाने दिए। उनके करियर की शुरुआत 1966 में तेलुगु फिल्म "श्री श्री मर्यादा रमन्ना" से हुई थी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

5 अगस्त 2020 को जब उन्हें कोरोना संक्रमण हुआ, तब लाखों फैंस ने उनकी सलामती की दुआ की, लेकिन 25 सितंबर 2020 को उन्होंने अंतिम सांस ली। संगीत की दुनिया में उनके योगदान को भारत सरकार ने भी सराहा और उन्हें पद्मश्री (2001), पद्म भूषण (2011) और मरणोपरांत पद्म विभूषण (2021) से नवाज़ा।

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