सरोज खान (फोटो-सोशल मीडिया)
मुंबई: भारतीय सिनेमा की कोरियोग्राफी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली सरोज खान का नाम आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है। उनके जीवन की कहानी सिर्फ संघर्षों से नहीं, बल्कि अटूट जज़्बे और डेडिकेशन से भरी हुई है। उन्होंने न सिर्फ बॉलीवुड को 3,000 से अधिक हिट गाने दिए, बल्कि अपने डेडिकेशन से हर कलाकार को सीख भी दी।
सरोज खान का असली नाम निर्मला किशनचंद संधू सिंह नागपाल था। उन्होंने बहुत कम उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रख दिया था। मात्र 3 साल की उम्र में उन्होंने ‘नजराना’ फिल्म में बेबी श्यामा के रूप में स्क्रीन पर शुरुआत की थी। लेकिन वो कोरियोग्राफी की दुनिया में कैसे पहुंचीं, इसकी कहानी कहीं ज्यादा इंस्पिरेशनल है। सरोज खान की जिंदगी में एक दिल तोड़ देने वाला समय भी आया था, जिसने उनके काम के प्रति डेडिकेशन को दुनिया के सामने रख दिया।
सरोज खान ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि जब उनकी बेटी महज आठ महीने की थी, तभी उसका निधन हो गया। उस दिन उन्होंने अपनी बच्ची को दफनाया और उसी शाम को ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ फिल्म के आइकॉनिक गाने ‘दम मारो दम’ की शूटिंग के लिए ट्रेन पकड़ ली। ये घटना बताती है कि सरोज खान के लिए काम पूजा के समान था और वे किसी भी हालत में उससे पीछे नहीं हटती थीं।
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सरोज खान ने अपने जीवन में कोई शॉर्टकट नहीं अपनाया। उन्होंने बी. सोहनलाल जैसे बड़े डांस मास्टर से असिस्टेंट के तौर पर सीखा और धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘नगीना’ के गाने मैं तेरी दुश्मन, ‘मिस्टर इंडिया’ का हवा हवाई, और ‘तेजाब’ का एक दो तीन जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। उनकी कोरियोग्राफी सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति और भावना का संगम होती थी। यही वजह है कि उन्होंने 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड, 3 नेशनल अवॉर्ड, और अमेरिकन कोरियोग्राफी अवॉर्ड जैसे कई बड़े सम्मान जीते।